मनुष्य अपने व्यक्तिव मे बहूत से परिभाषा ले कर जीता है। जीवन के उत्थान के लिए सपना देखना कल्पना करना सोचना ये सभी उसके अंधुरूनी क्रियाकलाप होते है। विषय वस्तु को समझकर क्रियान्वित करने से पहले सोचना विचार विमर्स करना उस कार्य के सफलता के लिए जरूरी है जो करना चाहता है। सोच मे पृस्थ्भिमी के निर्माण होने से कार्य मे आने वाली दिक्कत और सही मार्गदर्शन मिलता है। दिक्कत वाले रास्ते से हटकर सहज मार्ग को चुनना सोचने का महत्व होता है। कार्य के सफलता के लिए निरंतर प्रयाश उसको सकारात्मक परिणाम तक लेकर जाता है। काम की बारीकीयत जीवन मे दूसरे कम को सहज करने के लिए अनुभव प्रदान करता है। निरंतर प्रयाश और अथक परिश्रम जीवन मे अनुभव दिलाता है। जिससे व्यक्ति पारंगत कर अपने कार्य को पल भर मे पूरा कर लेता है।
बहूत जादा सोचना और कुछ भी नहीं करना व्यर्थ है वो सोच भी व्यर्थ हो जाता है जिसका कोई परिणाम जीवन मे नहीं मिले। इससे जीवन निराशा मे काटने लगता है। दिन प्रति दिन जीवन मे उत्साह घटने लग जाता है। कार्य करने की क्षमता समाप्त होने लग जाता है। शरीर मे हमेशा थकावट और आलश्य का निर्माण होता है। मानव शरीर मेहनत नहीं करने पर जल्दी जल्दी विमार पड़ता है। जिससे अनेकों बड़े बड़े रोग उत्पन्न होते है।
जीवन के उत्थान के लिए व्यायाम से शरीर निरोगी रहता है। कार्यालय मे दिमागी कार्य होने से मन और दिमाग थकता है जिसका प्रभाव शरीर पर पड़ता है। ऐसे व्यक्ति को सुबह शाम थोड़ा मेहनत करना चाहिए जिसे शरीर निरोगी रहे। इसका सबसे अच्छा जरिया व्यायाम है जिससे शरीर को चुस्ती फुर्ती और हलकापन मिलता है। कार्य करने की क्षमता बढ़ता है। शरीर चलाएमान होता है।
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