Tuesday, August 24, 2021

ज्ञान (Knowledge) के रमना में संपत्ति वास्तविक सुहावना होना चाहिए ज्ञान के पार्क है तो रमना मन मोहक भी होना चाहिए फूलो के बाग़ में है तो खुशबूदार भी होना चाहिए

ज्ञान (Knowledge) के पार्क में संपत्ति खरीदने के क्या फायदे हैं


ज्ञान (Knowledge) के रमना में संपत्ति वास्तविक है की सुहावना होना चाहिए 

ज्ञान के पार्क है। तो रमना मन मोहक भी होना चाहिए। फूलो के बाग़ में है तो खुशबूदार भी होना चाहिए। फलो के बाग़ में है तो मीठा रसीले भी फल भी खाने को मिलाना चाहिए। बगीचे में पेड़ पौधे झाड़ पतवार होना लाजमी है। दूर से खुबसुरत भी दिखे दिखावा अच्छा होना चाहिए।  बाग़ में बागवान भी होना चाहिए।


ज्ञान (Knowledge) के पार्क में तो सब उपलध है 

ज्ञान के नजरिये से जीवन को देखे तो अच्छा दिखने के लिए सबसे पहले मन, कर्म, वचन से सकारात्मक जरूर होना चाहिए। मन शीतल और मोहक होगा तो खुशबूदार अपने आप हो जायेगा। मन को शीतल करने के लिए जितने भी कूड़ा कड़कत मन में है निकल फेके। नाही तो यही झाड़ और पतवार बन जायेंगे। इसलिए झाड़ और पतवार को हमेशा साफ़ करते रहिये। ताकि ज्ञान के पार्क में पेड़ पौधे ठीक से उग सके। मन की शीतलता ज्ञान को सिचता है। जिससे मन आकर्षक होता है। खुशबूदार फुल कि तरह सबके बिच आकर्षण का केंद्र बनता है। ऐसे ब्यक्ति के ज्ञान, सोच समझ, विवेक बुध्दि से निकले ज्ञान मीठे रसीले फल की तरह उपयुक्त और फायदेमंद ही होते है। ऐसे ज्ञान के पार्क के बागवान निष्ठावान ब्यक्ति ही होते है।


जीवन का ज्ञान (Knowledge) अच्छाई के लिए ही होना चाहिए। 

संसार में हरेक वस्तु को ख़रीदा जा सकता है। प्राकृतिक देन को कभी खरीद नहीं सकते है। ज्ञान, कल्पना, सोच, समझ, बुध्दी विवेक ये सभी प्रकृति के देन है। इसको सजगता, सहजता, नम्रता, स्वभाव से जीवन में स्थापित किया जाता है। संसार का कोई भी कीमत इसका लगा ले और प्राकृतिक गुण को खरीद ले। ऐसा कोई हो तो हमें भी बताये। हम भी बहूत उत्सुक है। ज्ञान रूपी ये गुण अब बाज़ार में मिल रहे है। इसलिए ज्ञान के पार्क में संपत्ति खरीदने का मेरे नजर में कोई सवाल ही नहीं है। पर ज्ञान के पार्क में संपत्ति को अपने जीवन में स्थापित कर सकते है।

मन ज्ञान का प्रवेश द्वार है कल्पना ज्ञान का द्वार है जब तक मन कुछ अपने में नहीं लेगा तब तक कल्पना सार्थक नहीं होगा

ज्ञान (Knowledge) का द्वार या ज्ञान का प्रवेश द्वार जो सही है

मन ज्ञान (Mind Knowledge) का प्रवेश द्वार है 

कल्पना ज्ञान (Imagination Knowledge) का द्वार है 

जब तक मन कुछ अपने में नहीं लेगा। तब तक कल्पना सार्थक नहीं होगा। मन तो अपने अन्दर बहूत कुछ अपने में समेटे रखता है। पर सक्रीय वही होगा जो कल्पना में समां जायेगा। कल्पना मन का विस्तार है। मन पहेली भी रच सकता है। कल्पना संधि विच्छेद तक कर सकता है। द्वार तो मन ही है। उद्गम कल्पना है। जब तक संस्कार और ज्ञान अन्दर नहीं जायेगा। तब तक कल्पना के उद्गम में ज्ञान का आयाम कैसे बनेगा। सार्थकता तो उद्गम तक पहुचना होता है। प्रवेश द्वार के अन्दर जा कर कोई वापस भी आ सकता है। पर उद्गम में विचरण का मौका सबको नहीं मिलता है। मन आडम्बर कर के चला भी जा सकता है। कल्पना में जो गया वो विस्तार ही कर बैठेगा। नजरिया सबका अपना अपना है। मन के हारे हर मन के जीते जित होता है। स्वाबलंबन ज्ञान बढ़ाएगा। कर्महीनता आडम्बर रचेगा। समझ वही जो समझ सके तो ज्ञानी नहीं तो बाकि सब समझते है।     

जीवन (Life) को कैसे देखते हैं? जीवन की मुख्य मात्रा क्या हैं? जीवन को सबसे पहले ज्ञान (Knowledge) के माध्यम से समझना चाहिए

जिंदगी (Life)

जन्म से मृतु तक समय को जीवन (Life) कहते है 

बचपन में हस खेल कर बच्चे पढाई लिखाई करके मस्ती सरारत करते हुए रहते है। अपना जीवन बिताते हुए आगे बढ़ते है। किशोरावस्था में सही, गलत, अच्छा, बुरा सब प्रकार के ज्ञान को समझते हुए आगे बढ़ते है। शिक्षा प्राप्त करते है। जीवन के रंग को समझते है। जिंदगी में आगे बढ़ाते है। युवावस्था में जीवन के जिम्मेवारी को समझते है। घर परिवार के देख रेख, काम काज, लोग समाज में उठना बैठना सब प्रकार के ज्ञान और शिक्षा प्राप्त करते है। अपने जीवन के साथ जीवन संगिनी को प्राप्त कर के साथ साथ जीवन बिताते है। नए पीढ़ी के साथ आगे बढ़ते है। प्रौढ़ावस्था में जीवन के उतर चढ़ाव को समझते है। अपने अग्रज को अपने ज्ञान और अनुभव से शिक्षा देते है। समाज घर परिवार के देख रेख करते है। जीवन ब्यतित करते हुए आगे बढ़ते है। वृद्धावस्था में सब प्रकार के दुःख सुख का अनुभव करते है। एक एक कर के अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरो को देकर अपने जीवन के समापन की और बढ़ते है। बाद में मृतु को प्राप्त करते है। इस तरह से जन्म से मृतु तक जीवन ब्यतित होता है।    

 

 

आप जीवन (Life) को कैसे देखते हैं?

जीवन को सबसे पहले ज्ञान के माध्यम से समझना चाहिए। जीवन का सबसे बड़ा मूल्य शिक्षा और ज्ञान ही होता है। जिसपर जीवन का विकाश तरक्की उन्नति आधारित होता है। जीवन में शिक्षा और ज्ञान यदि भरा हुआ है तो सफलता उससे कभी दूर नहीं रहेगा। समझदारी जीवन में लोगो के बिच में कार्य ब्यवस्था में अनुभव को दर्शाता है। सरलता सहजता जीवन में सुख दुःख के समय अपने जीवन को किस तरह ब्यतित करते है। मुस्किल के समय और हार्स उल्लास में जीवन को सहज और सजग कैसे रखना है। बहूत ही उपयोगी गुण दर्शाता है। जीवन में अपने कार्य ब्यवस्था के तरफ  सक्रियता जिम्मेवारी को दर्शाता है। घर परिवार बच्चो बुजुर्गो के प्रति जिम्मेवारी बहूत जरूरी है। मनुष्य के जीवन के लिए, सदाचार सद्भाव जीवन के संरचना में बहूत अहेमियत रखता है।       

 

जीवन (Life) की मुख्य मात्रा क्या हैं?

जीवन के मुख्य मात्र १० प्रतिशत ही होते है। आध्यात्मिक ज्ञान के अनुसार मनुष्य सक्रीय चेतन मन १० प्रतिशत होते है। बाकि ९० प्रतिशत अचेतन होते है। सचेतन मन की सक्रियता जीवन के लिए विकाश और सफलता का कारण है। इसलिए जीवन की मुख्य मात्रा १० प्रतिशत सक्रिय मन हैं।

जिंदगी (Life) जीवन के मुख्य गुण क्या हैं? जीवन के मुख्या गुण सरलता सहजता एकाग्रता संतुलित सोच समझ

जिंदगी (Life)

जीवन के मुख्य गुण क्या हैं?

जीवन के मुख्या गुण सरलता, सहजता, एकाग्रता, संतुलित सोच समझ, विवेक बुध्दी पूर्ण कार्य और कर्तब्य, सौम्यता, करुना, जरूरी कल्पना, शांति, बौद्धिक, चंचलता, अपने कार्य में गतिमान, गतिशीलता, निर्भीक, संतुलन, अमीरी, गरीबी, सुख, दुःख, अपनापन, कोमलता, सम्मानित, जानकर, ज्ञानी, निर्मलता, गंभीरता ऐसे बहूत से सकारात्मक गुण है।

जीवन के गुण में नकारात्मक गुण भी होते है कठोरता, निर्ममता, संकुचितपना, निर्दैता, निष्ठुरता, दरिद्रता, असहज, असंतुलित सोच समझ, विवेकहीनता, बुध्दिहीन, मतलावी, मन की कल्पनो में डूबना, कर्म हीनता।  

क्या पिछले जन्म (Past life) मृत्यु तिथि और वर्तमान जन्म जन्म तिथि के बीच कोई संबंध है?

अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। जो की इस बात को प्रमाणित करे की क्या पिछले जन्म मृत्यु तिथि और वर्तमान जन्म तिथि के बीच कोई संबंध है। कई जगह देखा गया है। पुनर्जन्म कही भी ऐसा प्रमाण नहीं मिला है।

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