प्रस्तावना
Angkor Wat मंदिर विश्व के सबसे भव्य, विशाल और रहस्यमय प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर कंबोडिया देश में स्थित है और हिंदू धर्म की वैष्णव परंपरा को समर्पित एक महान धरोहर माना जाता है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में खमेर सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय द्वारा भगवान विष्णु की आराधना हेतु कराया गया था। अंकोर वाट केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि यह प्राचीन एशियाई सभ्यता, विज्ञान, खगोलशास्त्र और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम भी है।
इस मंदिर की भव्यता इसकी विशाल संरचना, सुंदर नक्काशी, रामायण-महाभारत पर आधारित शिल्पकला और अद्वितीय वास्तुकला में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अंकोर वाट को इस प्रकार निर्मित किया गया है कि यह हिंदू ब्रह्मांडीय अवधारणा ‘मेरु पर्वत’ का प्रतीक माना जाता है। समय के साथ यह मंदिर बौद्ध धर्म से भी जुड़ गया, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ गई।
आज अंकोर वाट न केवल कंबोडिया की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में पूरे विश्व में सम्मानित है। यह मंदिर इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं के लिए आस्था, ज्ञान और प्रेरणा का अमूल्य केंद्र है।
भौगोलिक स्थिति व प्राकृतिक परिवेश
दक्षिण-पूर्व एशिया के कंबोडिया देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है। यह सिएम रीप (Siem Reap) नगर के निकट, अंकोर क्षेत्र के विशाल पुरातात्विक परिसर का प्रमुख हिस्सा है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे प्राचीन काल से ही सामरिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती रही है। यह क्षेत्र मेकांग नदी बेसिन के अंतर्गत आता है, जहाँ उपजाऊ मैदान और समृद्ध जल संसाधन उपलब्ध हैं।
अंकोर वाट चारों ओर से हरे-भरे जंगलों, जलाशयों (बाराय), कृत्रिम नहरों और विशाल खाइयों से घिरा हुआ है। मंदिर के चारों ओर बनी चौड़ी जल खाई न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण थी, बल्कि यह जल प्रबंधन और धार्मिक प्रतीकात्मकता का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। यह खाई हिंदू दर्शन में वर्णित क्षीरसागर का प्रतीक मानी जाती है।
यहाँ की उष्णकटिबंधीय जलवायु, घने वृक्ष, मौसमी वर्षा और प्राकृतिक आर्द्रता मंदिर के वातावरण को रहस्यमय और आध्यात्मिक बनाती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मंदिर की छाया जल में प्रतिबिंबित होकर अलौकिक दृश्य उत्पन्न करती है। प्राकृतिक परिवेश और स्थापत्य का यह सामंजस्य अंकोर वाट को विश्व के सबसे सुंदर और अद्वितीय धार्मिक स्थलों में स्थान दिलाता है।
वास्तुकला व दर्शन संबंधी जानकारी
वास्तुकला प्राचीन खमेर सभ्यता की सर्वोच्च उपलब्धि मानी जाती है। यह मंदिर पूर्णतः बलुआ पत्थर से निर्मित है और इसकी संरचना हिंदू दर्शन में वर्णित ब्रह्मांडीय व्यवस्था पर आधारित है। मंदिर का केंद्रीय शिखर ‘मेरु पर्वत’ का प्रतीक है, जिसे देवताओं का निवास माना जाता है, जबकि इसके चारों ओर बने छोटे शिखर ब्रह्मांड के अन्य पर्वतों को दर्शाते हैं।
अंकोर वाट का स्थापत्य त्रिस्तरीय है, जिसमें प्रत्येक स्तर आध्यात्मिक उन्नति के एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है। निचला स्तर सांसारिक जीवन, मध्य स्तर साधना और तपस्या, तथा ऊपरी स्तर मोक्ष और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। मंदिर की परिक्रमा मार्ग, सममित द्वार, लंबी गलियारें और ऊँचे शिखर इसकी वैज्ञानिक योजना और संतुलन को दर्शाते हैं।
दीवारों पर उकेरी गई अद्भुत नक्काशियों में रामायण, महाभारत, समुद्र मंथन और देव-दानव कथाओं का सजीव चित्रण मिलता है। ये शिल्प न केवल धार्मिक कथाएँ कहते हैं, बल्कि तत्कालीन समाज, संस्कृति और दर्शन को भी प्रकट करते हैं। अंकोर वाट की वास्तुकला और दर्शन मानव, प्रकृति और ईश्वर के बीच सामंजस्य का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।