Monday, January 19, 2026

सहस्त्र लिंगम क्या है? जानिए इसका इतिहास, आध्यात्मिक महत्व, शिव भक्ति में इसका स्थान और सहस्त्र लिंगम पूजन से मिलने वाले पुण्य फल।

सहस्त्र लिंगम क्या है? इतिहास, महत्व व शिव भक्ति का प्रतीक

भूमिका

हिंदू सनातन परंपरा में भगवान शिव की उपासना का सर्वोच्च और सर्वमान्य प्रतीक शिवलिंग है। शिवलिंग न केवल एक मूर्ति या चिन्ह है, बल्कि यह सृष्टि की उत्पत्ति, संरक्षण और संहार—तीनों शक्तियों का दार्शनिक प्रतीक माना जाता है। इसी परंपरा में सहस्त्र लिंगम का विशेष स्थान है। सहस्त्र का अर्थ है हजार, अर्थात ऐसा पवित्र शिवलिंग जिसमें एक ही पत्थर या शिला पर हजारों सूक्ष्म शिवलिंग अंकित हों। सहस्त्र लिंगम को सामूहिक शिव-शक्ति, अनंत चेतना और अखंड भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

सहस्त्र लिंगम का अर्थ

सहस्त्र लिंगम शब्द दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है—

सहस्त्र = हजार

लिंगम = शिव का प्रतीक, निराकार से साकार का बोध

इस प्रकार सहस्त्र लिंगम का शाब्दिक अर्थ हुआ—हजार शिवलिंगों से युक्त एक महालिंग। यह दर्शाता है कि एक ही शिव-तत्व में अनगिनत रूप और शक्तियाँ समाहित हैं।

सहस्त्र लिंगम का पौराणिक इतिहास

पुराणों और शिव-उपासना परंपरा के अनुसार प्राचीन ऋषि-मुनि सामूहिक साधना और लोककल्याण के लिए सहस्त्र लिंगम की स्थापना करते थे। मान्यता है कि जब कोई एक साधक हजार शिवलिंगों की पूजा नहीं कर सकता, तब सहस्त्र लिंगम का एक बार पूजन हजार शिवलिंग पूजन के समान फलदायी होता है।

कुछ कथाओं में वर्णन मिलता है कि कठिन तपस्या, महामारी, अकाल या अधर्म के समय ऋषियों ने सहस्त्र लिंगम की स्थापना कर शिव कृपा प्राप्त की और समाज में संतुलन लौटाया।

सहस्त्र लिंगम और शिव तत्व का दार्शनिक अर्थ

शिव दर्शन में लिंग का अर्थ केवल आकृति नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र है।

एक शिवलिंग = एक चेतना

सहस्त्र लिंगम = हजार चेतनाओं का एकत्व

यह दर्शाता है कि ब्रह्मांड में फैली अनंत शक्तियाँ एक ही परम तत्व—शिव—से उत्पन्न हैं। सहस्त्र लिंगम हमें अनेकता में एकता का संदेश देता है।

सहस्त्र लिंगम का आध्यात्मिक महत्व

सहस्त्र लिंगम को अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। इसके दर्शन और पूजन से—

मन की अशांति शांत होती है

नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है

आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है

साधक को ध्यान और साधना में स्थिरता मिलती है

शिव कृपा से जीवन के कष्ट कम होते हैं

योग और तंत्र परंपरा में सहस्त्र लिंगम को सहस्त्रार चक्र से भी जोड़ा जाता है, जो चेतना का सर्वोच्च केंद्र है।

सहस्त्र लिंगम और शिव भक्ति

शिव भक्ति में संख्या नहीं, भावना का महत्व होता है, परंतु सहस्त्र लिंगम यह दर्शाता है कि असीम भक्ति भी सीमित रूप में व्यक्त की जा सकती है। एक साधारण भक्त, जो हजार शिवलिंगों की पूजा नहीं कर सकता, वह सहस्त्र लिंगम की आराधना कर समान पुण्य प्राप्त कर सकता है।

यह शिव की करुणा और भक्तवत्सलता का प्रतीक है।

सहस्त्र लिंगम की बनावट और स्वरूप

सहस्त्र लिंगम सामान्यतः—

काले ग्रेनाइट या शिलाखंड से निर्मित होता है

मुख्य लिंग के ऊपर चारों ओर सूक्ष्म शिवलिंग उकेरे होते हैं

कुछ सहस्त्र लिंगम में 1008 लिंग अंकित होते हैं

यह गोल, अंडाकार या बेलनाकार हो सकता है

यह शिल्पकला और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम है।

सहस्त्र लिंगम की पूजा विधि

सहस्त्र लिंगम की पूजा अत्यंत सरल किंतु प्रभावशाली मानी जाती है।

पूजा की सामान्य विधि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

शिवलिंग पर जल, दूध या गंगाजल अर्पित करें

बेलपत्र, धतूरा, भस्म और पुष्प चढ़ाएँ

“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें

दीप और धूप अर्पित करें

मान्यता है कि सहस्त्र लिंगम पर जल की प्रत्येक धारा हजार शिवलिंगों को अभिषिक्त करती है।

सहस्त्र लिंगम और विशेष अवसर

इन अवसरों पर सहस्त्र लिंगम पूजन विशेष फलदायी माना जाता है—

महाशिवरात्रि

सावन मास

सोमवार व्रत

प्रदोष व्रत

शिवरात्रि की रात्रि साधना

इन दिनों सहस्त्र लिंगम पर किया गया अभिषेक अनेक गुना फल देता है।

सहस्त्र लिंगम का तांत्रिक महत्व

तांत्रिक दृष्टि से सहस्त्र लिंगम को ऊर्जा-संरक्षक यंत्र माना जाता है।

यह स्थान की नकारात्मक शक्तियों को शांत करता है

ध्यान और साधना के लिए ऊर्जा क्षेत्र बनाता है

मंदिरों और आश्रमों में इसे विशेष स्थान पर स्थापित किया जाता है

कई साधक इसे ध्यान के समय एकाग्रता का केंद्र बनाते हैं।

सहस्त्र लिंगम और कर्म सिद्धांत

शिव को कर्मफल दाता भी कहा गया है। सहस्त्र लिंगम का पूजन—

पूर्व जन्मों के दोष कम करता है

कर्म बंधन से मुक्ति की ओर ले जाता है

जीवन में संतुलन और विवेक प्रदान करता है

यह हमें सिखाता है कि जब भक्ति सामूहिक और निष्काम होती है, तब उसका प्रभाव व्यापक होता है।

सहस्त्र लिंगम से जुड़ी लोक मान्यताएँ

लोक परंपराओं में मान्यता है कि—

सहस्त्र लिंगम के दर्शन से रोगों में राहत मिलती है

संतान सुख की कामना पूर्ण होती है

गृह क्लेश और मानसिक तनाव दूर होते हैं

हालाँकि यह सब आस्था पर आधारित है, पर शिव भक्ति की शक्ति को दर्शाता है।

सहस्त्र लिंगम और आधुनिक जीवन

आज के तनावपूर्ण जीवन में सहस्त्र लिंगम हमें—

धैर्य सिखाता है

अहंकार त्यागने की प्रेरणा देता है

यह बोध कराता है कि हम एक बड़े ब्रह्मांड का हिस्सा हैं

यह आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक बनकर आधुनिक मानव को भी मार्ग दिखाता है।

निष्कर्ष

सहस्त्र लिंगम केवल पत्थर पर उकेरे गए हजार शिवलिंग नहीं हैं, बल्कि यह अनंत शिव चेतना का साकार स्वरूप है। यह हमें सिखाता है कि एक में अनेक और अनेक में एक का दर्शन ही शिव तत्व है। सहस्त्र लिंगम की आराधना शिव भक्ति की गहराई, करुणा और व्यापकता को दर्शाती है।

जो भक्त सहस्त्र लिंगम के समक्ष श्रद्धा से नतमस्तक होता है, वह न केवल भगवान शिव से जुड़ता है, बल्कि स्वयं की अंतरात्मा से भी संवाद करता है।

विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे ऊँचे शिवलिंग की स्थापना का धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व जानें। दर्शन, आस्था, संस्कृति और पर्यटन से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।

विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे ऊँचे शिवलिंग सहस्त्र लिंगम की स्थापना धार्मिक आस्था व ऐतिहासिक महत्व (मंदिर निर्माणाधीन है)

भूमिका

भारत की आध्यात्मिक परंपरा में मंदिर केवल पूजा-स्थल नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और आस्था के जीवंत केंद्र रहे हैं। इसी परंपरा को वैश्विक पहचान देने की दिशा में विराट रामायण मंदिर एक भव्य और दूरदर्शी परियोजना के रूप में उभर रहा है। इस विराट परिसर में विश्व के सबसे ऊँचे शिवलिंग की स्थापना का प्रस्ताव सनातन संस्कृति के दो महान स्तंभों—राम और शिव—के आध्यात्मिक संगम का प्रतीक माना जा रहा है। यह पहल न केवल धार्मिक चेतना को सुदृढ़ करती है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित भी करती है।

विराट रामायण मंदिर: संक्षिप्त परिचय

विराट रामायण मंदिर बिहार में प्रस्तावित एक विशाल धार्मिक परिसर है, जिसका उद्देश्य रामायण परंपरा, भारतीय मूल्यों और सनातन दर्शन को आधुनिक स्थापत्य के साथ प्रस्तुत करना है। इस परिसर में रामकथा से जुड़े विविध प्रसंगों, तीर्थ-संरचनाओं और साधना-स्थलों का समावेश होगा। इसी विराट कल्पना का एक प्रमुख आयाम है—विश्व का सबसे ऊँचा शिवलिंग, जो श्रद्धालुओं के लिए शक्ति, ध्यान और भक्ति का केंद्र बनेगा।

विश्व के सबसे ऊँचे शिवलिंग की अवधारणा

शिवलिंग को सृष्टि, संरक्षण और संहार के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। “विश्व के सबसे ऊँचे शिवलिंग” की अवधारणा केवल भौतिक ऊँचाई तक सीमित नहीं है; यह आध्यात्मिक उत्कर्ष, सांस्कृतिक गौरव और स्थापत्य कौशल का संयुक्त प्रतीक है। प्रस्तावित शिवलिंग की ऊँचाई, संरचना और परिकल्पना इसे विश्व-स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करेगी।

प्रतीकात्मक अर्थ

ऊँचाई: आध्यात्मिक उन्नयन और चेतना की सर्वोच्च अवस्था

आकार: निराकार से साकार की यात्रा

स्थान: रामायण परंपरा के केंद्र में शिव-तत्त्व का प्रतिष्ठापन

सहस्त्र लिंगम की स्थापना – 17 जनवरी 2026

विराट रामायण मंदिर से जुड़ी जानकारी के अनुसार, सहस्त्र लिंगम (1008 शिवलिंग) की स्थापना 17 जनवरी को होने की बात कही जा रही है। यह आयोजन भगवान शिव की उपासना, सामूहिक रुद्राभिषेक और वैदिक परंपराओं से जुड़ा एक अत्यंत पावन धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है।

सहस्त्र लिंगम का धार्मिक महत्व

सहस्त्र (1008) शिवलिंगों की स्थापना पूर्णता, ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक मानी जाती है।

मान्यता है कि सहस्त्र लिंगम की पूजा से समस्त पापों का क्षय, मनोकामनाओं की पूर्ति और शिव कृपा प्राप्त होती है।

यह अनुष्ठान सामूहिक भक्ति, शांति और लोककल्याण के उद्देश्य से किया जाता है।

तमिलनाडु के महाबलीपुरम में निर्मित विशाल शिवलिंग

तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तैयार किया गया यह विशाल शिवलिंग सहस्त्र लिंगम अपने आप में अद्भुत स्थापत्य और इंजीनियरिंग का उदाहरण है। इस शिवलिंग की ऊँचाई 33 फीट, लंबाई 33 फीट तथा वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है। इसे अत्यंत सुदृढ़ पत्थरों से इस प्रकार निर्मित किया गया है कि यह केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और प्राचीन शिल्पकला का सुंदर संगम भी बन सके।

इस शिवलिंग के निर्माण में विशेष रूप से भूकंपरोधी तकनीक का उपयोग किया गया है। इसकी नींव और आंतरिक संरचना को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह भूकंपीय झटकों को सहन कर सके और लंबे समय तक सुरक्षित रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संरचना आने वाले सैकड़ों वर्षों तक बिना क्षति के सुरक्षित रह सकती है।

महाबलीपुरम, जो पहले से ही अपने ऐतिहासिक मंदिरों और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है, इस विशाल शिवलिंग के कारण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बन गया है। यह शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए भक्ति का केंद्र है और साथ ही भारतीय स्थापत्य कौशल की महानता का प्रतीक भी माना जाता है।

धार्मिक आस्था में शिवलिंग का महत्व

सनातन धर्म में शिवलिंग अनादि-अनंत का प्रतीक है। शिवलिंग पूजा से भक्तों में संयम, वैराग्य और करुणा का विकास होता है। विराट रामायण मंदिर में इसकी स्थापना यह संदेश देती है कि रामभक्ति और शिवभक्ति परस्पर पूरक हैं—दोनों मिलकर जीवन में धर्म, मर्यादा और करुणा का संतुलन रचते हैं।

रामायण और शिव-तत्त्व का आध्यात्मिक संगम

रामायण परंपरा में शिव-तत्त्व का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। राम स्वयं शिव-भक्त हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में शिव-आदर्शों—त्याग, सत्य और करुणा—का पालन करते हैं। इस मंदिर परिसर में शिवलिंग की स्थापना उसी आध्यात्मिक निरंतरता का प्रतीक है, जहाँ राम-मार्ग और शिव-मार्ग एक-दूसरे में समाहित होते हैं।

स्थापत्य कला और अभियांत्रिकी

विश्व के सबसे ऊँचे शिवलिंग के निर्माण में उन्नत अभियांत्रिकी, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक तकनीक का समन्वय अपेक्षित है। मंदिर और परिसर अभी निर्माणाधीन है।

मुख्य बिंदु:

सामग्री चयन: टिकाऊ पत्थर/मिश्रधातु, मौसम-प्रतिरोधी कोटिंग

संरचनात्मक सुरक्षा: भूकंप-रोधी डिजाइन, भार-संतुलन

सौंदर्यशास्त्र: शिल्प-संतुलन, प्रकाश-छाया का संयोजन

पर्यावरणीय दृष्टि: जल-संरक्षण, हरित ऊर्जा, न्यूनतम कार्बन फुटप्रिंट

आध्यात्मिक अनुभव और साधना

विराट शिवलिंग के दर्शन केवल दृष्टि-सुख नहीं, बल्कि ध्यान और साधना का अवसर प्रदान करेंगे। विशाल प्रांगण, शांत वातावरण और वैदिक मंत्रोच्चार भक्तों को अंतर्मुखी यात्रा पर ले जाएगा। यहाँ ध्यान, अभिषेक और सामूहिक आरती जैसी परंपराएँ आध्यात्मिक ऊर्जा को सुदृढ़ करेंगी।

ऐतिहासिक महत्व

भारत में विशाल शिवलिंग और भव्य मंदिरों की परंपरा प्राचीन काल से रही है। विराट रामायण मंदिर में विश्व-स्तरीय शिवलिंग की स्थापना इस परंपरा को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाती है। यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध हो सकती है—जहाँ आस्था, इतिहास और नवाचार का संगम होगा।

सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव

सांस्कृतिक पुनर्जागरण: लोककला, संगीत, नृत्य और शिल्प को प्रोत्साहन

सामाजिक समरसता: विविध समुदायों की सहभागिता

शैक्षिक आयाम: रामायण और शिव-दर्शन पर शोध व अध्ययन केंद्र

पर्यटन और आर्थिक विकास

इस विराट परियोजना से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

लाभ:

स्थानीय रोजगार के अवसर

आधारभूत ढाँचे का विकास

होटल, परिवहन और हस्तशिल्प को बढ़ावा

वैश्विक पहचान

विश्व का सबसे ऊँचा शिवलिंग भारत की आध्यात्मिक शक्ति और स्थापत्य क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उभार देगा। यह वैश्विक श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं को आकर्षित करेगा, जिससे भारत की “सॉफ्ट पावर” सुदृढ़ होगी।

पर्यावरणीय संतुलन और स्थिरता

आधुनिक मंदिर-निर्माण में पर्यावरणीय संतुलन अनिवार्य है। प्रस्तावित परियोजना में वर्षा-जल संचयन, सौर ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित क्षेत्र विकास जैसे उपायों पर बल दिया जा रहा है—ताकि आस्था के साथ प्रकृति-संरक्षण भी सुनिश्चित हो।

भविष्य की संभावनाएँ

विराट रामायण मंदिर और विश्व के सबसे ऊँचे शिवलिंग की स्थापना भविष्य में आध्यात्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक शांति-संदेश का केंद्र बन सकती है। यहाँ होने वाले उत्सव, सम्मेलन और साधना-कार्यक्रम भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई दिशा देंगे।


विराट रामायण मंदिर कैसे पहुँचे

विराट रामायण मंदिर बिहार में प्रस्तावित एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक परियोजना है। यहाँ पहुँचने के लिए सड़क, रेल और वायु—तीनों मार्गों से सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध हैं।

वायु मार्ग (By Air)

निकटतम हवाई अड्डा: जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना

दूरी: लगभग 115–120 किमी (परियोजना स्थल के अनुसार)

आगे का मार्ग: हवाई अड्डे से टैक्सी, कैब या बस द्वारा मंदिर क्षेत्र तक पहुँचा जा सकता है।

पटना देश के प्रमुख शहरों—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु—से नियमित उड़ानों द्वारा जुड़ा है।

रेल मार्ग (By Train)

निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन: पटना जंक्शन / हाजीपुर जंक्शन

कनेक्टिविटी: भारत के लगभग सभी बड़े शहरों से सीधी और कनेक्टिंग ट्रेनें उपलब्ध

स्टेशन से मंदिर: ऑटो, टैक्सी और स्थानीय बस सेवाएँ सुलभ

सड़क मार्ग (By Road)

पटना, मुजफ्फरपुर, वैशाली, छपरा जैसे शहरों से राज्य व राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा सुगम सड़क संपर्क

बस सुविधा: बिहार राज्य परिवहन एवं निजी बसें नियमित रूप से चलती हैं

निजी वाहन: कार/टैक्सी से सीधा और आरामदायक सफर

स्थानीय परिवहन

ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा, टैक्सी

भविष्य में परियोजना पूर्ण होने पर विशेष तीर्थ-परिवहन सेवाएँ शुरू होने की संभावना

यात्रियों के लिए उपयोगी सुझाव

पर्व और विशेष आयोजनों पर भीड़ अधिक हो सकती है—यात्रा पहले से योजना बनाएं।

मौसम के अनुसार वस्त्र व समय-सारिणी तय करें।

आधिकारिक सूचनाओं/स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।


विराट रामायण मंदिर के आस-पास घूमने की प्रमुख जगहें

विराट रामायण मंदिर के आसपास अनेक ऐसे धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल हैं, जो आपकी यात्रा को और अधिक आध्यात्मिक व ज्ञानवर्धक बना देते हैं। नीचे प्रमुख दर्शनीय स्थलों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है—

सीतामढ़ी – माता सीता की जन्मभूमि

सीतामढ़ी को माता सीता का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ स्थित जानकी मंदिर रामायण आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु यहाँ दर्शन, पूजा और रामकथा से जुड़े स्थलों का अनुभव करते हैं।

वाल्मीकि आश्रम

महर्षि वाल्मीकि से जुड़ा यह पवित्र स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का संगम है। मान्यता है कि यहीं लव-कुश का पालन-पोषण हुआ था।

केसरिया स्तूप

यह विश्व के सबसे ऊँचे बौद्ध स्तूपों में से एक है। बौद्ध इतिहास और स्थापत्य में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वैशाली

वैशाली विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों में से एक मानी जाती है। यह भगवान बुद्ध और भगवान महावीर—दोनों से जुड़ा हुआ ऐतिहासिक नगर है। यहाँ के स्तंभ, अवशेष और संग्रहालय दर्शनीय हैं।

पटना

बिहार की राजधानी पटना सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आधुनिक आकर्षणों का केंद्र है।

यहाँ आप तख्त श्री हरमंदिर साहिब, महावीर मंदिर, गंगा घाट और संग्रहालय देख सकते हैं।

छपरा

सरयू और गंगा के संगम क्षेत्र के निकट स्थित छपरा प्राकृतिक दृश्यों और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।

यात्रा का अनुभव

विराट रामायण मंदिर की यात्रा को यदि आप इन आस-पास के स्थलों के साथ जोड़ते हैं, तो यह यात्रा केवल दर्शन तक सीमित न रहकर रामायण, बौद्ध और जैन परंपरा की समृद्ध विरासत का समग्र अनुभव बन जाती है।


निष्कर्ष

विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे ऊँचे शिवलिंग की स्थापना केवल एक भव्य संरचना का निर्माण नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना का उत्सव है। यह पहल रामायण परंपरा, शिव-तत्त्व और आधुनिक भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास का संगम प्रस्तुत करती है। आस्था, इतिहास और भविष्य—तीनों का सेतु बनकर यह परियोजना सनातन संस्कृति को विश्व-पटल पर गौरवान्वित करेगी।


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