Saturday, June 21, 2025

सुबह सुबह ताजा स्वास के साथ नए बिचार और नए धारणाओं के साथ अच्छी सोच नए दिन के शुरुआत के साथ नए तरो ताजगी के साथ जीवन में आनंद भर देता है. मनो जैसे जीवन का आनंद ज्ञान का सागर हो

  

सुबह सुबह ताजा स्वास के साथ नए बिचार और नए धारणाओं के साथ अच्छी सोच सदा उपलब्धि दिलाता है 

ताजा स्वास के साथ जो ब्यर्थ मन में पड़े भाव है. जिनका कोई उपयोग नहीं है.

उसको बहार निकाल कर मन को शांत और आत्मा को तृप्त करता है.

सुबह सुबह जल्दी उठकर ढीला ढला वस्त्र पहनकर खली पैर हरी हरी घास पर चलने और नाक के दोनो भाग से एक साथ हौली हौली स्वास लेने से तन मन में तरोताजगी का प्रवाह होता है.

बुनियादी ज्ञान को बढ़ाता है जिससे जो कार्य जरूरी है सकारात्मक ऊर्जा उसको बढ़ता है.

ताजा स्वास के साथ नए दिन के शुरुआत के साथ नए तरो ताजगी के साथ जीवन में आनंद भर देता है.  

मनो जैसे जीवन का आनंद ज्ञान का सागर हो.

बुनियादी तौर पर ताजे स्वाश के साथ नया  ऊर्जा का प्रवाह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देता है.

जिससे ब्यर्थ भावनाये और विचार निकल जाते है.

दबी हुई भावनाये समाप्त हो कर नए तारो  ताजगी से दिल दिमाग में सक्रियता भर देते है.

जिससे मन मस्तिष्क शांत हो कर सक्रिय होता है.

मन ख़ुशी से प्रफुल्लित होता है.

सकारात्मक ऊर्जा सबसे पहले हमारे बुनियादी ज्ञान को बढ़ाता है.

जिससे जो कार्य जरूरी है सकारात्मक ऊर्जा उसको बढ़ता है.

सकारात्मक क्रिया स्वास लेना बहूत जरूरी है. 

सुबह सुबह जल्दी उठकर ढीला ढला वस्त्र पहनकर खली पैर हरी हरी घास पर चलने और नाक के दोनो भाग से एक साथ हौली हौली स्वास लेने से तन मन में तरोताजगी का प्रवाह होता है. ये प्रवाह सकारात्मक होना चाहिए. उस समय किसी भी प्रकार के काम काज का या कोई तनाव नहीं होना चाहिए. सुबह सुबह मन निश्चल होता है. इसलिए सुबह सुबह किसी भी प्रकार का तनाव नहीं लेना चाहिए. खुशिया और प्रशन्नता के लिए तरोताजगी के लिए सुबह सुबह खली पैर हरी हरी घास पर चलन चाहिए. 

ताजा स्वास के साथ   

सार्वभौमिक मानव ज्ञान में तकनीकी ज्ञान का उपयोग करने के तरीके वाणिज्य स्नातक कंप्यूटर साहित्य 1-2 वर्ष के अनुभव

  

सार्वभौमिक मानव ज्ञान आधुनिक ब्यवस्था में तकनिकी ज्ञान अतिआवश्यक है।

सार्वभौमिक मानव ज्ञान मे आज कल के समय में कंप्यूटर, लैपटॉप, टैब और मोबाइल के जरिये कार्यालय में काम करना अनिबार्य हो गया। जिसके ज्ञान के बिना अब कुछ संभव नहीं है। इसलिए किसी भी क्षेत्र में अत्याधुनिक इलेक्ट्रोनिक यन्त्र का ज्ञान बहूत जरूरी हो गया है। आने वाला भविष्य में अत्याधुनिक इलेक्ट्रोनिक यन्त्र का ज्ञान ही मानवता हो काम धंदा दे सकता है। इसलिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रोनिक यन्त्र का ज्ञान अतिआवश्यक और अनिवार्य है।  

 

मानव ज्ञान में तकनीकी ज्ञान का उपयोग करने के तरीके

ज्ञान मानव जीवन के जरूरी होने के साथ काम काज का भी माध्यम है। ज्यादाकर लोग आज कल के समय में कार्यालय में काम करते है। चाहे किसी भी क्षेत्रे में हो, काम करने का माध्यम अत्याधुनिक इलेक्ट्रोनिक यन्त्र कंप्यूटर, लैपटॉप, टैब और मोबाइल के जरिये ही काम करते है। सार्वभौमिक मानव व्यवस्था  में तकनीकी ज्ञान का उपयोग करना अब आवश्यक हो गया है। कंप्यूटर के जरिये हिसाब किताब रखना, खाता के सभी जानकारी को कंप्यूटर लैपटॉप में एक-एक लेन देन का हिसाब संगणित करना, डिजाईन और काम के प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाना। लैपटॉप के जरिये ग्राहकों को प्रदर्शन दिखाना, सामान के खरीदारी के लिए आकर्षित करना।

ब्यावासिक प्रतिष्ठान के प्रचार प्रसार के लिए वेबसाइट बनाना। दूर देश में बैठे लोगो को ब्यावासिक प्रतिष्ठान प्रदर्शन दिखाने के लिए वेबसाइट बहूत अच्छा माध्यम है। लैपटॉप, टैब के जरिये ऑनलाइन ब्यवहार और बातचीत करने का सबसे अच्छा माध्यम है। जिसमे गूगल मेल, वाट्स अप्प, टेलीग्राम आदि अप्प के जरिये टैब और मोबाइल से बर्तालाप कर सकते है।  सामाजिक मीडिया  फेसबुक, ट्विटर, इन्स्ताग्राम, यूट्यूब, रेड्दित, मोज, के जरिये सार्वभौमिक मानव व्यवस्था में तकनीकी ज्ञान के जरिये प्रचार प्रसार करते है। मोबाइल मुख्य तौर पर बातचीत करने के लिए किया जाता है।

सन्देश भेजने के लिए जाता है। ऑनलाइन और ऑफलाइन, जहा पर ऑनलाइन ब्यवस्था नहीं होते है। वह पर मोबाइल के जरिये बर्तालाप या सन्देश के जरिये लोगो को ब्यावासिक प्रतिष्ठान के बारे में प्रचार प्रसार करते है। जिससे काम धंदा फलता फूलता है। इस तरह से वर्त्तमान में सार्वभौमिक मानव ज्ञान में तकनीकी ज्ञान का उपयोग करते है।    

 

मैं मोबाइल के माध्यम से सूक्ष्म कार्य का ज्ञान कैसे प्राप्त करूं?

आज कल के समय में बहूत अच्छे अच्छे मोबाइल निकल गये है। जिसमे फोटो निकालने के लिए अत्याधुनिक तकनिकी के कैमरा आ चुके है। सूक्ष्म कार्य जो बहूत छोटे होते है। उनको फोटो निकाल कर बड़ा कर के देख सकते है। सूक्ष्म कार्य को पूरा कर सकते है। कोई काम कर रहे है। जिसके बारे में छोए मोटे जानकारी मोबाइल इन्टरनेट के जरिये निकल कर जिसका ज्ञान पहले से मालूम नहीं होता है। उस ज्ञान को पढ़कर काम को पूरा कर सकते है। कोई भी काम इतना आसान नहीं होता है। जितना लोग समझते है। किसी भी काम के गहराई में जाने के बाद ही मालूम पड़ता है। उस कम का आयाम क्या होता है।

ये कोई जरूरी नहीं है की मनुष्य को पूरा ज्ञान होता ही है। कही न कही कुछ न कुछ बाकि जरूर रह ही जाता है। जैसे किसी काम का सूक्ष्म अनुभव के लिए कही न कही से ज्ञान और अनुभव का सहारा लेना ही पड़ता है। मौजूदा समय में हर ब्यक्ति के हाथ में कंप्यूटर लैपटॉप साथ में इन्टरनेट मौजूद हो ये जरूरी नहीं है। हर ब्यक्ति के हालत एक जैसे नहीं होते है। 

ज्यादाकर लोगो के हाथ में मोबाइल इन्टरनेट के साथ होते है। जिसमे खोज बिन कर के काम का सूक्ष्म अनुभव प्राप्त कर सकते है। आज के समय में इन्टरनेट पर हर प्रकार का ज्ञान मौजूद होता है। पढ़कर समझकर विडियो देखकर हर कार्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। इस तरह से मोबाइल के माध्यम से सूक्ष्म कार्य का ज्ञान कैसे प्राप्त कर सकते है।   

 

वाणिज्य स्नातक कंप्यूटर साहित्य 1-2 वर्ष के अनुभव के साथ अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान आवश्यक

वाणिज्य स्नातक कंप्यूटर साहित्य 1-2 वर्ष के अनुभव के साथ अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान होना बहूत आवश्यक है। आज कल के समय में हर कार्य अंग्रेजी भाषा में ही होता है। अंग्रेजी भाषा अंतर रास्ट्रीय भाषा है। कंप्यूटर, लैपटॉप, टैब, मोबाइल सब मुख्य तौर पर मुख्य भाषा अंग्रेजी भाषा में ही चल रहे है। ब्यावासिक प्रतिष्ठान में ज्यादाकर अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग किया जाता है। सहकर्मी भी अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग करते है। इसलिए वाणिज्य स्नातक कंप्यूटर साहित्य 1-2 वर्ष के अनुभव के साथ अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान अतिआवश्यक है। 

सयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित येलो स्टोन नेशनल पार्क लगभग ३५०० स्कवायर माईल में फैला हुआ है.

  

येलो स्टोन नेशनल पार्क

सयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित येलो स्टोन नेशनल पार्क लगभग ३५०० स्कवायर माईल में फैला हुआ है.

पार्क ३ राज्य में मिला हुआ है. मुख्य रूप से ये व्योमिंग राज्य में पड़ता है.

थोडा हिस्सा मोंताना और आयडाहो राज्य में पड़ता है.

येलो स्टोन नेशनल पार्क में जाने के लिए पाच रस्ते है.

उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पशिम और उत्तर पूर्व से पार्क में दाखिल हो सकते है.

गरम पानी के झरना के लिए प्रसिद्ध है.

लगातार कुछ समय रुक रुक कर गरम पानी में से वाष्प के फब्बारे निकलते रहते है.

जिन्हें ओल्ड फेथफुल कहा जाता है.

जहा पर बहूत सरे गरम पानी के झील और झरना है जो पुरे क्षेत्र में फैला हुआ है.

फायरहोल नदी और मायरिअद क्रीक के पास मौजूद है.

ओल्ड फेथफुल गीजर पास मौजूद झरना और गीजर जिन्हें अलग अलग नाम दिए हुए है.

जंगली जानवर को देखने के लिए ये एक प्राचीन पार्क है.

दुनिया में पहला पार्क का दर्जा मेल हुआ है.

दुनिया में सबसे ज्यादा ईसी पार्क के क्षेत्र है जो तीन राज्य के सीमा के अन्दर दाखिल है.

अनुपन दृश्य और मनोहारी छवि निकलने के लिए दुनिया भर से लोग  घुमने और मजा लेने जाते है.

पीले रंगो के आभा के साथ गरम पनि का उठता फबबारा लोगोग के बीच मुख्य मनोरंजन का कारण है।

शर्दी के डीनो मे यहा घूमने से अमेरिका मे पड़ने वाले ठंडी से थोड़ा राहत मिलता है।
येलो स्टोन नेशनल पार्क में जाने के लिए पाच रस्ते है

समाज के लिए क्या सिफारिशें समाज जहा एक संगठन जहा पर लोग आपस के मिलते है समाज में बैठने वाले लोग सकारात्मक सोच के बुद्धिजीवी लोग होते है

  

ज्ञान समाज के लिए क्या सिफारिशें हैं?

 

समाज का मतलब क्या है

समाज के ज्ञान मे सबसे पहले ये समझते है की सामाजिक संगठन को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाना। समाज जहा एक संगठन है। जहा पर लोग आपस के मिलते है। समाज में बैठने वाले लोग सकारात्मक सोच के बुद्धिजीवी लोग होते है। वही समाज में बैठते है। जो अछे विचारक हो। जिनके स्वभाव शांत सरल और सजग होते है। कुछ अच्छी बाते करते है। जहा पर हर तबके के लोग पर विचार विमर्स होता है। क्या सही हैक्या गलत हैजो गलत है। उसको कैसे सही करे किस रास्ते से सही करे की वो गलती दूर हो। सबके लिए एक अच्छा माहौल तयार हो।

 

समाज में ज्ञान के तौर पर कही किसी के बिच में किसी प्रकार के वाद विवाद होता है 

जब आपस में नहीं सुलझ पता है। तब दोनों में से कोई एक पक्ष समाज के बिच आकर अपना बात रखता है। तब समाज के लोग दोनों पक्ष के लोग को बुलवाकर दोनों पछ के बाते सुनते है। क्या सही हैक्या गलत हैदोनों पक्ष को अवगत कराते है। दोनों पक्ष को सही जानकारी देते है। जिससे चल रहे बात विवाद दूर हो और आगे चल कर भविष्य दोनों के बिच किसी भी प्रकार का कोई परेशानी पैदा नही हो।

 

  समाज के ज्ञान 

समाज के ज्ञान में ज्यादाकर समाज जाती विशेष पर आधारित होता है 

जहा पर अपने जाती के हर तबके के लोग का भूमिका होता है। समय समय पर समाज के लोग अपनी अपनी बात को रखने के लिए समाज के सब लोगो को बुलाकर जो जरूरी है। सब अपना अपना बात को रखते है। जाती के लोगो के विकाश के लिएसंगठन को मजबूत करने के लिए सब एकजुट हो कर कार्यरत होते है। 

 

समाज के ज्ञान में पंचायत को भी एक समाज समझ सकते है 

पंचायती समाज जहा एक क्षेत्रकसबेगाँव के सभी लोगो के लिए होता है। उसको पंचायत कहते है। जिसमे सभी तबके के लोगो के लिए सामान अधिकार होता है। इसमे कुछ पद भी होते है। जैसे मुखियासरपंचसभा सदस्यग्राम सभा सदस्य इत्यादि। कसबेगाँव के विकास के लिए पंचायत सरकार से गुहार लगाकर विकाश के कार्य को पूरा करते है। जिसका लाभ कसबेगाँव के सभी लोगो को मिलता है।

 

ऐसे बहूत से समाज निम्नलिखित है जो अपने अपने क्षेत्र में कार्यरत है।  कुछ मुख्य समाज के नाम    

 

शिकार और सभा समाज।
देहाती समाज।
बागवानी समाज।
कृषि समितियाँ।
औद्योगिक समाज।
उत्तर-औद्योगिक समाज
। 

 

समस्या क्या होता है? हर समस्या का समाधान स्वयं के पास ही होता है.

  

सूझ बुझ से अपनी समस्या का समाधान सिर्फ अपने पास ही होता है.

दूसरो के पास तो केवल देने के लिए सिर्फ सुझाव होते है.

 

सूझ बुझ से समस्या का समाधान अपने पास ही होता 

किसी काम में या किसी विषय पर फस जाना और कोई रास्ता नहीं निकलता है की वो काम पूरा कैसे हो.

ज्ञान और तजुर्बा होने के बाबजूद भी जब सब कुछ धरा रह जाता है और कोई विकल्प नहीं रहता है. ऐसे में समस्या खड़ा होना लाजमी है.

 

समस्या कहाँ से होता है?

ज्ञान का सही इस्तेमाल नही होने से समस्या खड़ा होता है.

तजुर्बा बहूत बड़ी चीज है यदि तजुर्बा का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं हुआ तो भी समस्या खड़ा हो जाता है.

विषय की बरिकियत को ठीक से नहीं समझने से समस्या खड़ा हो जाता है.

गलत समझ से भी समस्या खड़ा हो जाता है.

कई बार किसी काम में ठीक से मन नहीं लगने से और इधर उधर ध्यान भटकने से भी जो एकाग्रता भंग होता है इससे भी समस्या खड़ा होता है.

 

सूझ बुझ से किये गए कार्य में हर समस्या का समाधान स्वयं के पास ही होता है.

विषय को ठीक से समझ कर सूझ बुझ से किये गए कार्य में सफलता मिलता है.

किसी भी कार्य या विषय में मन का लगाना बहुत जरूरी है इससे एकाग्रता बढ़ता है जो सफलता की निशानी है.

इससे विषय से हटकर मन इधर उधर नहीं भटकता है.

काम सफल होता है. जटिल कार्य या विषय को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और बरिकियत का अनुभव की आवश्यकता होता है.

इन्सान जीवनभर अपने और दुसरे के अनुभव से कुछ न कुछ दिन प्रतिदिन सीखता ही रहता है जो तजुर्बा बनकर नये सृजन का निर्माण करता है.

 

कोई जरूरी नहीं की दिय गया कार्य एक ही पद्धति से हो.

दुसरे जरिये या ज्ञान से भी पूरा होता है तो नया तजुर्बा जन्म लेता है.

यही प्रगति की निशानी भी है.

इससे काम सरल और कम समय में भी पूरा होता है जो दूसरो के लिए प्रेरणा का काम करता है.

एक रास्ता बंद हो रहा है तो कही न कही से दुसरे रास्ता स्वयं खुलने लग जाता है.

ज्ञान और तजुर्बा सही ढंग से कार्य कर रहा है तो दूसरा रास्ता स्वयं खुल जाता है. 

 

विकत परिस्तिथि में समस्या होने पर क्या होता है?

कोई दुसरा, अपने या सुभचिन्तक अपने को रास्ता ही बता सकता है या अच्छा विचार दे सकता है.

उस कार्य को तो स्वयं को ही पूरा करना होता है.

विपरीत परिस्तिथि में दूसरो के पास केवल देने के लिए सिर्फ सुझाव ही होते है.

जिससे मार्ग प्रदर्शन मिलता है. कार्य तो स्वयं को करना होता है.

  समस्या का समाधान 

समय चक्र मनुष्य को मनुष्य से जोड़कर सबको ज्ञान और व्यावहार के संग्रह में परिभाषित करता है ज्ञान का सागर और यही जीवन यापन भी है

  

समय चक्र बलवान होता है आज ख़ुशी  तो कल दुःख फिर से ख़ुशी और फिर दुःख ऐसा जीवन चक्र है।

आज समय चक्र कितना बलवान है। समय के चक्र के बारे में संज्ञान होना चाहिए।

समय चक्र में आज ख़ुशी है तो कल दुःख फिर से ख़ुशी और फिर दुःख ऐसा जीवन चक्र है।

इससे क्या होता है? यही जीवन का वास्तविक चक्र है।

जिसे सभी को मानना पड़ता है। समय चक्र को समझना ही पड़ता है।

बच्चा  जन्म लेता है। तब बाल्यावस्ता में होता है। फिर किशोरावस्ता में जाता है।

आगे चलकर युवावस्था  आता है।

फिर उसके बाद अधवेशावस्ता में जाता है।

फिर वृद्धावस्ता में जा कर अपने अंतिम चरण मृत्यु को प्राप्त करता है।

यही तो जीवन चक्र है। इसी में मनुष्य अच्छा बुरा सुख दुःख सब भोगविलास करता है।

कभी अकेले तो कभी साथ में जीवन व्यतीत करता है।

बचपन में माता पता के साथ रहना।

उसके बाद  पत्नी के साथ रहकर एक लम्बा जीवन ब्यतीत करता है।

फिर बाद में अपने अपने बल बच्चों के साथ और पोता पोती के साथ समय गुजारता है।

 

अंत में मृत्यु को प्राप्त कर के अपने उस घर को जाता है।

जहाँ से ज्ञान पाने के लिए आया होता है।

अब ये सवाल उठ रहा है की मनुष्य का जीवन है क्या?

उसका क्या अस्तित्व है? बहुत बड़ा अस्तित्व है।

समझा जाए तो वही जीवन चक्र एक से दूसरे को जोड़ता है।

एक दूसरे से सब को जुडाहुआ है।

ताकि एक का ज्ञान दूसरे को मिले जो अनजान है।

ज्ञान कही छुपा नहीं रहता है।

 

तर्क वितर्क में ज्ञान उत्पन्न हो ही जाते है।

वही मनुष्य को मनुष्य से जोड़कर सबको ज्ञान और व्यावहार के संग्रह में परिभाषित करता है।

जीवन यापन होता है। ज्ञान प्राप्त कर के हर मनुष्य एक न एक दिन अपने उसी स्थान पर पहुंचेंगे।

जहा से यहाँ आये थे।  हम क्यों नहीं इस समय का सदउपयोग करे। एक दूसरे का साथ दे।

उनका अच्छा ज्ञान हमें मिले। अपना अच्छा ज्ञान उनको मिले।

इससे सबका समय अच्छा होने लगेगा। ये ज्ञान का सागर और यही जीवन यापन भी है।

बाकि सर्वोच्च ज्ञान में जन्म से मृत्यु और मृत्यु के बाद क्या बचता है। ज्ञान ही तो रह जाता है।

 

समय चक्र जीवन के कल्पना में आधार स्तंभ में ज्ञान हर पड़ाव पर आवश्यक है।

समय चक्र मनुष्य के जीवन के कल्पना में सबसे बड़ा आधार स्तंभ ज्ञान ही होता है। ज्ञान का जीवन में हर पड़ाव पर आवश्यक होता है। बुद्धि विवेक के विकाश के साथ साथ जीवन में संतुलन और सहजता के लिए ज्ञान बहुत जरूरी है। नहीं तो ज्ञान के अधूरेपन से जीवन में उथलपुथल भी आ सकता है। आमतौर पर बाल्यावस्ता से ही ज्ञान का विकाश शुरू कर देना चाहिए। जिससे सोचने समझने की क्षमता बात विचार करने की क्षमता प्राप्त हो। आगे चलकर जीवन में आने वाली कठिनायों  को पार करने होते है।

जीवन के रूकावट को दूर करने के लिए भी इंसान को बुद्धि विवेक से बहुत मेहनत करना पड़ता है। जीवन के उतार चढ़ाओ में हर मोर पर हर रस्ते पर चाहे काम धंधा हो, सेवा भाव हो, दुनियादारी हो, समाज में उठना बैठना हो, घर परिवार में सब जगह बुद्धि  विवेक, सूझ बुझ की बहुत आवश्यकता होता है। इसलिए ज्ञान जीवन में बहूत आवश्यक है। ज्ञान जीवन चक्र में संतुलन को बनाये रखता है।

 

समय चक्र को कभी भी अपने जीवन में कम नहीं आकना चाहिए।

माना की अपने जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा है। तरक्की के दौर से भी गुजर रहे है पर इस समय के ज्ञान को बनाये रखने के लये अपने जीवन में उतना ही सक्रियता बरक़रार रखना होगा। हरेक विषय वस्तु के प्रति भी उतनी ही जागरूकता जरूरी है और उसमे कभी भी कमी नहीं आने दे। समय हमें बहूत कुछ देता है उसे संभलकर रखना चाहिए। जरूरत और उपयोगिता के अनुसार ही अपने अर्जित धन खर्च करना चाहिए। मन पर किसी का भी नियंत्रण नहीं है। मन कब किस ओर खीच लेगा कुछ कह नहीं सकते है। अपने पास सब कुछ है तो अपने मन पर भी नियंत्रण बहूत जरूरी है जिससे में सफलता फलता फूलता रहे। घमंड कभी भी नहीं करना चाहिए। दूसरो के निरादर से सदा बचना चाहिए। ये सभी ऐसे दुर्गुण है जो इन्सान से एक दिन सब कुछ छीन भी सकता है।

 समय चक्र 

समय और अवस्था कोई माये नहीं रखता सिर्फ मायने वही छोटी चीज़ का रह जाता है भले वह काम कितना भी महत्वपूर्ण क्यों नहीं हो

  

समय और अवस्था मे चीज़े छोटी हो या बड़ी भरी हो या हल्का मायने नहीं रखता है

समय और अवस्था मे चीज़े छोटी हो या बड़ी भरी हो या हल्का ये मायने नहीं रखता है।

जब जहा किसी चीज़ की जरूरी होती है तो उसको उपलब्ध कराना ही पड़ता है।

जब कोई विशेष महत्वपूर्ण काम में ब्यस्त होते है।

सारा चीज़ उपक्रम उपलब्ध होने के बाद भी कुछ न कुछ चीज़ जब रह जाता है।

तब वह समय और अवस्था कोई माये नहीं रखता है। फिर मायने वही छोटी चीज़ रह जाता है।

भले वह काम कितना भी महत्वपूर्ण क्यों नहीं हो।

महत्त्व तो जो उस चीज़ का होता है। जो वहा से गायब है। कारण वही रह जाता है।

काम नही पूरा हुआ सबकुछ तो बिगड़ गया।

काम महत्वपूर्ण है। चीज़े छोटी हो या बड़ी ध्यान उसपर लगना ही चाहीये।

ध्यान बराबर होगा तो कोई कोई भी चीज़ भूलने का सवाल ही नहीं होगा।

फिर काम अपने समय में कायदे से पूरा हो जायेगा। 

बाते छोटी हो या बड़ी यदि वो अच्छा है तो सबको अच्छा लगता है

बाते छोटी हो या बड़ी यदि वो अच्छा है। तो सबको अच्छा लगता है। महत्वपूर्ण तब होता है। जब बाते एक छोटी चीज़ की तरह महत्वपूर्ण होकर जब लोगो को अच्छा लगता है। तब बहुत वाहवाही होता है। तब सब लोग उस ब्यक्ति को पसंद करते है। मान सम्मान देते है। जब किसी व्यक्ति का बात कुछ बुरा हो भले ही वो छोटी बात ही क्यों न हो। तब वह छोटी चीज़ नुखिले तिनके की तरह सुनाने वाले के दिल में चुबने लगता है।

आज के समय में अच्छी बात हो तो सबको अच्छा लगता ही है। पर किसी का एक छोटा बुरा बात भी लोगो को बुरा लग जाता है। और वो बात लोगो में जहर की तरह फ़ैल जाता है। इसका परिणाम उस बात को बोलने वाले को भुगतना पड़ता है। होना तो ये चाहिए की मन अच्छी बाते स्वीकार करे। यदि कोई बुरी बात है। तो मन से कभी नही लगाना चाहिए। किसी के बुरे बात पर प्रतिक्रिया करने से अच्छा है। कि एक अच्छा नागरिक होने के नाते समझाना चाहिये। कि ऐसी बात से लोग को बुरा लगता है। बात विचार सौहाद्रपूर्ण होना चाहिये। जो सबको अच्छा लगे।

 समय और अवस्था 

सज्जन व्यक्ति अपने निष्ठा और सत्य के बल पर सुख और दुःख से भरे दोनों रास्ते पर चलते है

  

सज्जन व्यक्ति को चाहे करोड़ों दुष्ट लोग मिलें फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नहीं छोड़ता है.

 

स्वभाव सरल और व्यवहार सहज सज्जन व्यक्ति का होता है.

इंसान के मन में लालच और दूसरो से कुछ लेने की भावना नहीं होते है.

यदि इंसान किसी से कुछ लेते है तो उनको वापस करने का वादा जरूर करते है.

जब तक इंसान अपने ऊपर लगे कर्ज के बोझ को नहीं उतार लेते है तब तक उनका मन शांत नहीं होता है.

भले सज्जन व्यक्ति के जीवन में कुछ उपलब्धि मिले या नहीं मिले पर वो मन, कर्म और वचन से सुद्ध जरूर होते है.

 

शुद्धता और निर्मलता सज्जन व्यक्ति के पहचान होते है.  

चाहे कोई भी कुछ कह दे उससे उनके ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

अच्छा और उचित विचार लेना और देना इंसान का परम कर्तव्य होता है.

कोई उसे बुरा भला कहे, भद्दी बात कहे तो भी उनके अन्दर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

लाख गन्दगी के बिच में भी सज्जन व्यक्ति को छोड़ दिया जाये तो इंसान के मन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

शुद्धता पवित्रता निर्मलता के गुण से ही इंसान के गुण और व्यवहार में निखर लाता है. सांसारिक जीवन में सत्य है.

इंसानके पास धन सम्प्पति भले कम अर्जित करे पर अपने जीवन को किसी गलत कार्य में लगने नहीं देते है.

संतुलित जीवन के ज्ञान से परिपूर्ण सज्जन व्यक्ति मन से प्रसन्नचित और व्यवहार में इमानदार जरूर होते है.

जिसपर कोई भी व्यक्ति बेझिजक विश्वास कर सकता है.

अपने अनुभव से सज्जन व्यक्ति अपने चाहने वाले के मन में बस जाते है.

 

संतुलित सोच समझ से सज्जन व्यक्ति के किसी भी जरूरी कार्य में रुकावट नहीं आता है.

इंसान अपने जीवन में संतुलित समझ के साथ जीते है.

सत्य और संतुलन पर निष्ठा रखते है.

असत्य, मिथ्या, पाखंड, धोखादारी, दूसरो के साथ छल कपट उनके जीवन में रंच मात्र भी नहीं होता है.

इस कारन से सज्जन व्यक्ति के कोई दुश्मन या बुरा चाहने वाला जल्दी नहीं होता है.

मन के संतुलित भाव से उनके जीवन परिपूर्ण होते है.

सही और गलत की परख उनके जीवन की मुख्या विशेषता होता है.

सही को अपनाना और गलत से दूर रहना सरल व्यक्ति के जीवन का वास्तविक अर्थ है.

अपने ज्ञान और गुण के माध्यम से गलत राह पर चलने वाले को सही ज्ञान ऐसे व्यक्ति जरूर देते है.

भले गलती करने वाला उनके बात को समझकर गलती करना छोड़े या अपने राह पर चलते रहे इससे इंसान को कोई फड़क नहीं पड़ता है.

 

सज्जनता का कर्म ही होता है सही रास्ते पर चलाना.

सज्जन व्यक्ति अपने निष्ठा और सत्य के बल पर सुख और दुःख से भरे दोनों रास्ते पर चलते है.

जीवन की सच्चाई सुख और दुःख दोनों में निहित है.

लालच, बुरे कर्म से दूर रहने वाला व्यक्ति ही अपने उच्चतम मुकाम तक पहुच पाता है.

सत्य और उचित के लिए अपने जीवन को न्योछावर करने की काविलित सिर्फ सज्जन व्यक्ति में ही होते है.

निडरता से भरे इंसान  किसी से डरते नहीं है.

सत्य बात को उजागर करने की सामर्थ सिर्फ इंसान के अन्दर ही होता है.

इसलिए ऐसे व्यक्ति को सरल और सहज भी कहा जाता है.

भले जीवन का रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो पर इंसान के व्यवहार में कोई अंतर नहीं होता है.  

सज्जन व्यक्ति

सच्चे मन की कल्पना में सोच समझ से यथार्थ से परिचय के लिए संतुलित जीवन का होना बहुत जरूरी हैं.

  

सच्चे मन की कल्पना स्वतः होते है. 

अपने सच्चे मन की कल्पना अस्तित्व की पहचान कराता है.

इसमें किसी प्रकार का कोई जोर जबरदस्ती नहीं होता है.

ये तब प्रकाश में आता है जब मन शांत हो एकाग्र हो.

किसी प्रकार का कोई उथल पुथल का भाव नही हो.

कर्म को प्रधानता देता हो. स्वबलंबी हो. कर्मठ हो. आदर्शवादी हो.

ब्यक्ति का मन पवित्र होता है.

उनके समझदारी में निष्पछता होन चाहिए है.

इसलिए ऐसे ब्यक्ति अपने नियम के दायरे के बहार कभी नहीं जाते है.

चाहे यथार्थ में या कल्पना. वे जो भी सोचते है या है वास्तविकता से परे नहीं होता है.

इसलिए उनका कल्पना सोच समझ सच्चे होते है. जो आगे चलकर पुरे भी होते है.

सच्चे मन की कल्पना की सोच में अस्तित्व की पहचान एक मर्यादित ब्यक्ति के लिए है. जो वही करता जो सोचता है. 

उनका सोचना या कल्पना वही तक होता है. जो पूरा हो सके.

इससे उनको अपने जीवन का पूरा ज्ञान होता है.

ऐसे ब्यक्ति के जीवन में एक तो कार्य क्षमता बहुत होते है.

जिससे वो अपने वर्त्तमान को संभलकर रखते है.

भविष्य की कल्पन ऐसे ब्यक्ति न के बराबर करते है. वर्त्तमान को सही रखने के लिए उनके पास संतुलित विवेक बुद्धि होते है. जिससे वो मन से नियंत्रण में रखते हुए स्वयं में संतुलित होकर संतुष्टि से रहते है. इसलिए उनका अस्तित्व की पहचान होते रहता है.

जीवन में सोच समझ से यथार्थ से परिचय के लिए संतुलित जीवन का होना बहुत जरूरी हैं. 

संतुलित ब्यक्ति को पता होता है. की सब कुछ सोच समझ पर निर्भर होता है. अपने सोच समझ के बहार जाने का मतलब विवेक बुद्धि को ख़राब करना होता है. जब जरूरी विषय विमर्श करते है. तो परिणाम निश्चित ही मिलता है. अपने जरूरी क्रिया कलाप करने से ही यथार्थ से परिचय होता है.

सच्चे मन की कल्पना

सक्रिय कल्पना में सोच समझ विवेक बुद्धि स्वभाव मिलनसार और जागरूक ब्यक्ति अपने जीवन में ज्ञान के विकाश और ख्याति के लिए बहुत कुछ करते है

  

सक्रिय कल्पना का जीवन में बहुत बड़ा महत्व है

कल्पना में सोच समझ सक्रिय कल्पना का जीवन में बहुत बड़ा महत्व रखता है। 

खास करके ऐसे ब्यक्ति के लिए जो सकारात्मक होते है। 

जो ब्यक्ति कई क्षेत्र में अपने खास स्वभाव और ब्यक्तित्व के वजह से अपनी ख्याति प्राप्त किया है। 

उनका सोच, समझ, विवेक, बुद्धि, स्वभाव मिलनसार और जागरूक होते है। 

ऐसे ब्यक्ति अपने जीवन में ज्ञान के विकाश और ख्याति के लिए बहुत कुछ करते है।

 

सक्रीय कल्पना करने के लिए मन सक्रीय होकर एकाग्र भाव में रहना चाहिए

सक्रीय कल्पना करने के लिए मन को अच्छी तरह से सक्रीय होकर एकाग्र भाव में रहना चाहिए।  

मन, सोच, समझ, बुध्दी, विवेक सकारात्मक और संतुलित होना आवश्यक है। 

जिससे अपने सोच समझ के दौरान कल्पना में स्पष्ट चित्रण हो सके। 

जब कल्पना सहज होने लगता है।  तब जैसी कल्पना करते है।

मन का स्वभाव भी वैसा ही होने लगता है। 

इससे मन कल्पना के अनुसार कार्य में लग जाता है।

कार्य सटीक और जल्दी होने लगता है। 

ऐसे सक्रीय कल्पना के लिए प्रयास बारम्बार करना पड़ता है।

जब तक की मन सहज भाव में कल्पना न करे।

वैसे इस प्रयास में सबको सफलता नहीं मिलता है। 

सक्रीय कल्पना के लिए एकाग्रता का निरंतर प्रयास करने वाले को ही सक्रीय कल्पना में सफलता मिलता है।

  कल्पना में सोच समझ 

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