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Friday, January 14, 2022

विवेक बुद्धि दिमाग के सकारात्मक पहलू होते है (Wisdom and Intelligence) मन जब सकारात्मक होता है तो शांत होता है एकाग्र होता है एकाग्र मन में सकारात्मक विचार होते है जिससे सकारात्मक तरंगे दिमाग में जाता है

विवेक बुद्धि (Wisdom and Intelligence) दिमाग के सकारात्मक पहलू है


विवेक बुद्धि में दिन प्रति दिन मानव का समय (Time is running out) बीतते चला जा रहा है 

बच्चे जन्म लेते है बड़े होते है, अब हम सब बुढ़े होते जा रहे है, कई बार हम ये सोचते है की जिस तारीके से दिन बीतते जा रहा है, ऐसे गतिशील समय में ऐसा लगता है, कुछ सोचे तो कुछ और होता है, जो सोचते है वो फलित नहीं होता है, ऐसा लग रहा है जैसे सरे सोच व्यर्थ होते जा रहे है, उस सोच को पूरा न होते देख कर हम अक्सर दुखी ही रहते है, आखिर ये सब का कारन क्या है, जो सोचते है, वो होता नहीं है, होता वो है, जिसके बारे में सोचते नहीं है, ऊपर से इन सभी के कारण दुःख का भाव, तो इसका रास्ता क्या निकलेगा। 


विवेक बुद्धि से सोचे भाई इसका कोई रास्ता नहीं निकलेगा (there's no way out) नहीं निकलने वाला है 

जो समय पीछे छूट गया है, उसे पूरी तरह से छोड़ दे, तो ही जीवन में फिर से ख़ुशी आयेगी, जो समय हमे आगे मिला हुआ है, कम से कम उसका सदुपयोग करे, और पुरानी  बाते को मन से निकला दे, तो ख़ुशी ऐसे ही हमें मिलाने लगेगी, हमें पता है, की ख़ुशी मिलने से ही हमें ताकत भी मिलती है, जिससे हमें ऊर्जा मिलता है, तो क्यों न हम ख़ुशी के तरफ ही भागे और पुरानी बाते को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ते जाय, जो बित गया उससे कुछ मिलाने वाला नहीं है सिवाय दुःख के। 


विवेक बुद्धि के अनुसार  बीती यादें में भवनाओ का असर (Effect of feelings) होता है 

मन की आदत वैसे  ही बानी हुई है, अच्छी चिजे निकल जाती है, क्योकि उसमे भावनाओ का असर होता  है, अच्छी चीजे वो है जिसमे कोई भाव नहीं होता है, सिर्फ और सिर्फ ख़ुशी का एहशास होता है, वो रुकता नहीं है, आगे जा कर दुसरो को ख़ुशी देता है, वो सब के लिए है, भावनाये तो वास्तव में उसका होता है जो हमारे मन में पड़ा हुआ है, तीखी कील की तरह चुभता रहता है, तो ऐसे भाव को रख कर क्या मतलब, जो दुःख ही देने वाला है। 


विवेक बुद्धि के मतलब ऐसे भाव भावाना से बच कर ही रहे (Stay away from emotion) तो सबसे अच्छ है 

जो बित गया उसे भूल जाए, आगे का जीवन ख़ुशी से गुजारे,  नए जीवन की प्रकाश ओर बढे,  उसमे हमें क्या मिल पा रहा है,  उस ओर कदम बढ़ाये नए रस्ते पे चले  जहा पिछली कोई यादो का पिटारा न हो, जहा पिछला कोई भाव न हो। 


विवेक बुद्धि में समय (Time is running day by day) दिन प्रति दिन भागते जा रहा है 

हर पल को ख़ुशी समझ कर बढ़ते रहे, अच्छी चीजे को ग्रहण करे, जिसमे कोई पड़ेशानी कोई दुःख या कोई ब्यवधान हो तो उसको पार करते हुए  अपनी मंजिल तक पहुंचे  दुविधाओ को मन से हटा के चले,  जीवन में बहुत कुछ आते है,  बहुत कुछ जाते है, उनसे ज्ञान लेकर आगे बढ़ते रहे  खुशी से रहे  प्रसन्नचित रहे आनंदित रहे।  


विवेक बुद्धि से समझे तो दुविधाए (Troubles nothing happens) कुछ नहीं होता है  मन (Mind is delusional) का भ्रम होता है  

सही सूझ बुझ से अपने कार्य को विवेक बुद्धि से करे तो हर रूकावट दूर होता रहता है  सय्यम  रखे  किसी प्रकार के बिवाद को मन पर हावी न होने दे मन में सय्यम रखते हुए बुद्धि का उपयोग करे  हर  कार्यो में सफलता मिलेगा। 


विवेक बुद्धि दिमाग (Discretion intelligence is the positive aspect of the mind) के सकारात्मक पहलू होते है 

मन जब सकारात्मक होता है तो शांत होता है  एकाग्र होता है  एकाग्र मन में सकारात्मक विचार होते है  जिससे सकारात्मक तरंगे  दिमाग में जाता है  दिमाग ऊर्जा का क्षेत्र होता है  जो सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ता है  विवेक बुद्धि इससे सकारात्मक होता है  यदि विवेक बुद्धि सकारात्मक नहीं हो तो उसे विक्छिप्त माना जाता है विक्छिप्त प्राणी के मन में भटकन होता है उसके मन के उड़ान बहुत तेज ख्यालो में रहता है जिसको कभी पूरा नहीं कर सकता है ख्याल, विचार, मस्तिष्क में होने पर सक्रियता समाप्त होने लगता है जो की थिक नहीं है। सक्रिय मस्तिष्क ही  कार्य को पूरा करने में मदत करता है  जिससे मन शांत रहता है  जरूरी कार्य में मदत करता है  कार्य पूरा होता है।   





Thursday, July 29, 2021

सुबह सुबह ताजा स्वास के साथ नए बिचार और नए धारणाओं के साथ अच्छी सोच नए दिन के शुरुआत के साथ नए तरो ताजगी के साथ जीवन में आनंद भर देता है. मनो जैसे जीवन का आनंद ज्ञान का सागर हो

सुबह सुबह ताजा स्वास के साथ नए बिचार और नए धारणाओं के साथ अच्छी सोच सदा  उपलब्धि दिलाता है 

जो ब्यर्थ मन में पड़े भाव है. जिनका कोई उपयोग नहीं है. उसको बहार निकाल कर मन को शांत और आत्मा को तृप्त करता है.


नए दिन के शुरुआत के साथ नए तरो ताजगी के साथ जीवन में आनंद भर देता है.  

मनो जैसे जीवन का आनंद ज्ञान का सागर हो, बुनियादी तौर पर ताजे स्वाश के साथ नया  ऊर्जा का प्रवाह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देता है. जिससे ब्यर्थ भावनाये और विचार निकल जाते है, दबी हुई भावनाये समाप्त हो कर नए तारो  ताजगी से दिल दिमाग में सक्रियता भर देते है. जिससे मन मस्तिष्क शांत हो कर सक्रिय होता है. मन ख़ुशी से प्रफुल्लित होता है. सकारात्मक ऊर्जा सबसे पहले हमारे बुनियादी ज्ञान को बढ़ाता है जिससे जो कार्य जरूरी है सकारात्मक ऊर्जा उसको बढ़ता है.


सकारात्मक क्रिया स्वास लेना बहूत जरूरी है. 

सुबह सुबह जल्दी उठकर ढीला ढला वस्त्र पहनकर खली पैर हरी हरी घास पर चलने और नाक के दोनो भाग से एक साथ हौली हौली स्वास लेने से तन मन में तरोताजगी का प्रवाह होता है. ये प्रवाह सकारात्मक होना चाहिए. उस समय किसी भी प्रकार के काम काज का या कोई तनाव नहीं होना चाहिए. सुबह सुबह मन निश्चल होता है. इसलिए सुबह सुबह किसी भी प्रकार का तनाव नहीं लेना चाहिए. खुशिया और प्रशन्नता के लिए तरोताजगी के लिए सुबह सुबह खली पैर हरी हरी घास पर चलन चाहिए.   


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