एकादशी साल में आने वाली सभी एकादशी का महत्व
भूमिका : एकादशी क्या है?
एकादशी क्यों महत्वपूर्ण है?
एकादशी का पालन करने से व्यक्ति अपनी जीवनशैली अनुशासित करता है और यह अनुशासन धीरे-धीरे उसके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने लगता है।
वार्षिक एकादशियों का विस्तृत आध्यात्मिक विवरण
नीचे वर्षभर आने वाली सभी एकादशियों का क्रमवार वर्णन, कथा, विशेष पूजा-विधि और लाभ दिए जा रहे हैं।
पौष कृष्ण पक्ष – सफला एकादशी
महत्व:
कथा:
कहा जाता है कि राजा महिष्मत के पुत्र लुम्बक ने पाप कार्य किए। निष्कासन के बाद उसने अनजाने में एकादशी व्रत किया और उसके सारे पाप नष्ट हुए।
लाभ:
पौष शुक्ल – पुत्रदा एकादशी
महत्व:
संतान प्राप्ति, परिवारिक वृद्धि, गृहस्थ सुख प्राप्ति का दिन।
कथा:
भद्रसेन राजा को पुत्र नहीं था। ऋषियों ने पुत्रदा एकादशी का व्रत बताया और उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ।
लाभ:
माघ कृष्ण – षट्तिला एकादशी
महत्व:
तिलदान, तिलस्नान, तिलभोजन के कारण यह शरीर और मन की शुद्धि का दिन है।
कथा:
एक ब्राह्मणी ने दान नहीं किया। भगवान ने उसे तिल-व्रत का आदेश दिया, जिससे उसके जीवन में सुख बढ़ा।
लाभ:
माघ शुक्ल – जया एकादशी
महत्व:
पितृदोष, भूत-प्रेत बाधाओं, नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाती है।
कथा:
स्वर्ग के वेलंटक नामक उपद्रव का निवारण इसी एकादशी से हुआ।
लाभ:
फाल्गुन कृष्ण – विजया एकादशी
महत्व:
यात्रा, नए कार्य, संघर्षों में विजय प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ।
कथा:
रामायण में वर्णित है कि श्रीराम जी ने लंका जाने से पहले विजय एकादशी का व्रत किया और विजय प्राप्त की।
लाभ:
फाल्गुन शुक्ल – आमलकी एकादशी
महत्व:
आंवला वृक्ष की पूजा, विष्णु कृपा और स्वास्थ्य लाभ देती है।
कथा:
राजा चितरथ ने आमलकी एकादशी का व्रत कर प्रजा को सुखी बनाया और स्वयं को भी मोक्ष मिला।
लाभ:
चैत्र कृष्ण – पापमोचनी एकादशी
महत्व:
किसी भी पाप, अपराध, मानसिक बुराइयों से मुक्ति का दिन।
कथा:
ऋषि मेधाव और अप्सरा मनोज्ञा की कथा इसका मुख्य आधार है।
लाभ:
चैत्र शुक्ल – कामदा एकादशी
महत्व:
कामना पूर्ण करने वाली एकादशी—परिवार, विवाह, धन, कार्य-सिद्धि।
कथा:
नागराज के सैनिक ललित को गलत आरोप में शाप लगा। इस व्रत से मुक्ति मिली।
लाभ:
वैशाख कृष्ण – वरूथिनी एकादशी
महत्व:
यह रक्षक है—शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, पारिवारिक सुरक्षा प्रदान करती है।
वैशाख शुक्ल – मोहिनी एकादशी
महत्व:
मोह, नशा, भ्रम, वासनाओं से मुक्ति; आत्मसंयम बढ़ाती है।
कथा:
विष्णु का मोहिनी अवतार इसी तिथि पर प्रकट हुआ।
ज्येष्ठ कृष्ण – अपरा एकादशी
महत्व:
पापनाशिनी, पापों का 'अपार' फल देने वाली।
ज्येष्ठ शुक्ल – निर्जला एकादशी
महत्व:
आषाढ़ कृष्ण – योगिनी एकादशी
महत्व:
विविध रोग, कष्ट, बुरे कर्मों से मुक्ति दिलाती है।
आषाढ़ शुक्ल – देवशयनी एकादशी (हरिशयनी)
महत्व:
श्रावण कृष्ण – कामिका एकादशी
महत्व:
रुद्र-भक्ति, शिव-पार्वती की कृपा, सौभाग्य-वृद्धि।
श्रावण शुक्ल – पवित्रा एकादशी (पवित्रोपन)
महत्व:
धार्मिक शुद्धि, संकल्पों में स्थिरता, जीवन दिशा निर्धारण।
भाद्रपद कृष्ण – अजा एकादशी
महत्व:
राजा हरिश्चंद्र को सत्य पालन में सहायता देने वाली एकादशी।
भाद्रपद शुक्ल – परिवर्तिनी एकादशी
महत्व:
विष्णु भगवान करवट बदलते हैं—नए आरंभ के लिए शुभ।
आश्विन कृष्ण – इंदिरा एकादशी
महत्व:
पितरों की तृप्ति, श्राद्ध कर्म में विशेष।
आश्विन शुक्ल – पापांकुशा एकादशी
महत्व:
कर्म-बंधन काटने वाली।
कार्तिक कृष्ण – रमा एकादशी
महत्व:
लक्ष्मी-प्राप्ति, घर में धन वृद्धि, सौभाग्य।
कार्तिक शुक्ल – देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी)
महत्व:
विष्णु जागरण, विवाह-मुहूर्त का प्रारंभ, तुलसी-विवाह।
मार्गशीर्ष कृष्ण – उत्पन्ना एकादशी
महत्व:
एकादशी देवी के प्राकट्य दिवस—समस्त पापों का नाश।
मार्गशीर्ष शुक्ल – मोक्षदा एकादशी
महत्व:
गीता जयंती—मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी।
अधिमास की एकादशी (पुरुषोत्तम मास)
महत्व:
ये दोनों एकादशियाँ विष्णु की विशेष कृपा पाने का अवसर देती हैं।
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