Thursday, June 19, 2025

जीवन को कैसे देखते हैं? जीवन की मुख्य मात्रा क्या हैं? जीवन को सबसे पहले ज्ञान (Knowledge) के माध्यम से समझना चाहिए

  

जन्म से मृतु तक समय को जीवन कहते है 

बचपन में हस खेल कर बच्चे पढाई लिखाई करके मस्ती सरारत करते हुए रहते है। अपना जीवन बिताते हुए आगे बढ़ते है। किशोरावस्था में सही, गलत, अच्छा, बुरा सब प्रकार के ज्ञान को समझते हुए आगे बढ़ते है। शिक्षा प्राप्त करते है। जीवन के रंग को समझते है। जिंदगी में आगे बढ़ाते है। युवावस्था में जीवन के जिम्मेवारी को समझते है। घर परिवार के देख रेख, काम काज, लोग समाज में उठना बैठना सब प्रकार के ज्ञान और शिक्षा प्राप्त करते है।

अपने जीवन के साथ जीवन संगिनी को प्राप्त कर के साथ साथ जीवन बिताते है। नए पीढ़ी के साथ आगे बढ़ते है। प्रौढ़ावस्था में जीवन के उतर चढ़ाव को समझते है। अपने अग्रज को अपने ज्ञान और अनुभव से शिक्षा देते है। समाज घर परिवार के देख रेख करते है। जीवन ब्यतित करते हुए आगे बढ़ते है। वृद्धावस्था में सब प्रकार के दुःख सुख का अनुभव करते है। एक एक कर के अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरो को देकर अपने जीवन के समापन की और बढ़ते है। बाद में मृतु को प्राप्त करते है। इस तरह से जन्म से मृतु तक जीवन ब्यतित होता है।    

 

 

आप जीवन को कैसे देखते हैं?

अपने जीवन को सबसे पहले ज्ञान के माध्यम से समझना चाहिए। जीवन का सबसे बड़ा मूल्य शिक्षा और ज्ञान ही होता है। जिसपर जीवन का विकाश तरक्की उन्नति आधारित होता है। जीवन में शिक्षा और ज्ञान यदि भरा हुआ है तो सफलता उससे कभी दूर नहीं रहेगा। समझदारी जीवन में लोगो के बिच में कार्य ब्यवस्था में अनुभव को दर्शाता है। सरलता सहजता जीवन में सुख दुःख के समय अपने जीवन को किस तरह ब्यतित करते है। मुस्किल के समय और हार्स उल्लास में जीवन को सहज और सजग कैसे रखना है। बहूत ही उपयोगी गुण दर्शाता है। जीवन में अपने कार्य ब्यवस्था के तरफ  सक्रियता जिम्मेवारी को दर्शाता है। घर परिवार बच्चो बुजुर्गो के प्रति जिम्मेवारी बहूत जरूरी है। मनुष्य के जीवन के लिए, सदाचार सद्भाव जीवन के संरचना में बहूत अहेमियत रखता है।       

 

जीवन की मुख्य मात्रा क्या हैं?

जीवन के मुख्य मात्र १० प्रतिशत ही होते है। आध्यात्मिक ज्ञान के अनुसार मनुष्य सक्रीय चेतन मन १० प्रतिशत होते है। बाकि ९० प्रतिशत अचेतन होते है। सचेतन मन की सक्रियता जीवन के लिए विकाश और सफलता का कारण है। इसलिए जीवन की मुख्य मात्रा १० प्रतिशत सक्रिय मन हैं।

जीवन के विकाश और उन्नति के लिए अतिआवश्यक है ज्ञान श्रीष्ठाचार सिखाता है अदब सिखाता है आचरण सिखाता है व्यवहार सिखाता है

  

विषयों के ज्ञान के बिना एक अच्छा व्यवहार करने वाला व्यक्ति सफल कैसे हो जाता है?

 

ज्ञान जीवन के विकाश और उन्नति के लिए अतिआवश्यक है ज्ञान श्रिस्ताचार सिखाता हैअदब सिखाता है आचरण सिखाता है। व्यवहार सिखाता है बातचित करने की कला सिखाता हैकोई भी विषय का ज्ञान अपने ज्ञान को बढ़ाने का ही काम करता हैज्ञान प्राप्त करने के लिए विषय एक माध्यम होता है। जिससे जीवन में ज्ञान का विकाश होता है

  जीवन के विकाश 

 

जीवन में ज्ञान के प्रभाव से रहन सहन में सृस्ताचार, अदब, आचरण, व्यवहार, सरलता, सहजता, निर्भीकता, जिज्ञासा जैसे महान गुण जीवन में स्थापित होते हैजो ब्यक्ति को सफल और निर्भीक बनाता हैइसलिए विषयों के ज्ञान के बिना एक अच्छा व्यवहार करने वाला व्यक्ति सफल हो जाता है

जीवन के मुख्य गुण क्या हैं? जीवन के मुख्या गुण सरलता सहजता एकाग्रता संतुलित सोच समझ

  

जीवन के मुख्य गुण क्या हैं?

अपने जीवन के मुख्य गुण सरलता, सहजता, एकाग्रता, संतुलित सोच समझ, विवेक बुध्दी पूर्ण कार्य और कर्तब्य, सौम्यता, करुना, जरूरी कल्पना, शांति, बौद्धिक, चंचलता, अपने कार्य में गतिमान, गतिशीलता, निर्भीक, संतुलन, अमीरी, गरीबी, सुख, दुःख, अपनापन, कोमलता, सम्मानित, जानकर, ज्ञानी, निर्मलता, गंभीरता ऐसे बहूत से सकारात्मक गुण है।

जीवन के गुण में नकारात्मक गुण भी होते है कठोरता, निर्ममता, संकुचितपना, निर्दैता, निष्ठुरता, दरिद्रता, असहज, असंतुलित सोच समझ, विवेकहीनता, बुध्दिहीन, मतलावी, मन की कल्पनो में डूबना, कर्म हीनता।  

जीवन के मुख्य गुण

क्या पिछले जन्म (Past life) मृत्यु तिथि और वर्तमान जन्म जन्म तिथि के बीच कोई संबंध है?

अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। जो की इस बात को प्रमाणित करे की क्या पिछले जन्म मृत्यु तिथि और वर्तमान जन्म तिथि के बीच कोई संबंध है। कई जगह देखा गया है। पुनर्जन्म कही भी ऐसा प्रमाण नहीं मिला है। 

जीवन के प्रेरणा स्त्रोत तब कहा जाता है. जब किसी के जीवन में कोई प्रेरणा किसी अछे व्यक्ति से मिलता है. जिससे वो अपने जीवन में परिवर्तन कर के प्रगति करता है

  

प्रेरणा स्त्रोत जीवन के तब कहा जाता है. जब किसी के जीवन में कोई प्रेरणा किसी अछे व्यक्ति से मिलता है.

प्रेरणा स्त्रोत जिससे वो अपने जीवन में परिवर्तन कर के प्रगति करता है.

जिनके ज्ञान से अपने जीवन को लाभान्वित करता है.

कल्पना का प्रभाव ऐसा होता है की जिसके जीवन किसी के मिल जय तो ख़ुशी और प्रसन्नता जीवन में भर जाता है.

जिनके जीवन में ख़ुशी और प्रसन्नता जीवन में स्थापित हो गया.

समझ लीजिये उनका जीवन सफल है. किसी का जीवन में बहुत कुछ लाता है.

प्रेरणा स्त्रोत विज्ञान के विषय में सुरु में जिन विज्ञानिको ने जो आविस्कर किया.

उससे प्रेरणा लेकर उनके बाद आने वाले विज्ञानिको ने दिन प्रति दिन आविस्कारो को बढ़ाते हुए आज हम सब के लिए जीवन सुलभ कर दिया है.

यदि आज के समय में हम लोग किसी भी क्षेत्र में कुछ करना कहते है.

तो सभी कही न कही विज्ञान के ही देन है.

इसलिए हमलोगों के लिए सबसे बड़ा विज्ञान ही है.

भले लोग इस बात को माने या न माने.

चाहे दुनिया के किसी भी क्षेत्र में जा कर देखे.

सब जगह विज्ञान के ही आविस्कर है.

जो दुनियाभर के विज्ञानिको ने ही किया है.

आज के समय में तो सबसे बड़ा प्रेरणा के स्त्रोत वैज्ञानिक ही है.

अविष्कारक ही सृष्टि के जननी होते है. जिस तरह कोई व्यक्ति सिर्फ ज्ञान से पूरा सफलता नहीं प्राप्त कर सकता है.

जब तक की अच्छा अनुभव नहीं प्राप्त हो अनुभव ही ज्ञान का विस्तार करता है. नए सृजन का निर्माण करता है. ज्ञान का अनुभव भी होते है. सिर्फ अपने लिए ही नहीं अपितु अपने ज्ञान का अनुभव दूसरो के लिए भी बनता है. जो दुनियाभर के विज्ञानिको ने ही किया है आज के समय में तो सबसे बड़ा प्रेरणा के स्त्रोत वैज्ञानिक ही है. किसी के जीवन में बहुत कुछ लाता है.

  प्रेरणा स्त्रोत 

जीवन के उतार चढ़ाव में कल्पना का बहुत बड़ा महत्त्व होता है जिनके मनोबल कमजोर होता है जिनके पास आत्मबल और मनोबल मजबूत होता है उनके मन पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ता है।

  

जीवन के उतार चढ़ाव में कल्पना का बहुत बड़ा महत्त्व होता है।   

अपने जीवन के उतार चढ़ाव में आखिर किसी भी असफलता का कारन क्या होता है। सबसे पहले सोचना चाइये की कहाँ क्या कमी रह गया है।  कहाँ पर क्या करना था और क्या हो गया है।   यही सोच विचार जब करते है तो उसको कल्पना कहा जाता है। मनुष्य चाहे किसी भी स्तर पर क्यों न हो  चाहे काम धंदा ब्यापार, समाज के बिच रहना बात बिचार करना, पढाई लिखाई, खेल कूद, उन्नति अवनति हर क्षेत्र में ब्यक्ति विकास करने के लिए कुछ न कुछ विचार करता है। उस सोच समझ को ही कल्पना कहते है।

 

जीवन के उतार चढ़ाव मे सबसे गहन सोच कल्पना तब होता है 

जब किसी का बहुत बड़ा नुकशान होता है मगर उस समय ज्यादाकर लोग विवेक बुद्धि के आहात होने के वजह से लोग कल्पनातीत भी हो जाते है। जिनके अंदर मनोबल कमजोर होता है या एकाग्रता का अभाव होता है। बहुत ज्यादा नुकशान होने से लोग नकारात्मक भी सोच लेते है या कल्पना में नकारात्मक भाव आता है  इसका मुख्य कारण मनोबल का कमजोर होना ही होता है  जो एकाग्रता को भंग  कर देता है। 

मन तो वास्तव में ऐसा होना चाइये की जो दुःख में हतोत्साहित न हो और सुख में उत्तेजना न हो  दोनो ही स्तिथि में सम रहने से जीवन में स्थिरता का निर्माण होता है। विवेक बुद्धि सक्रिय होता है  जीवन में सरलता और सहजता आता है  जो ब्यक्ति को निर्भय बनता है  आत्मबल और मनोबल मजबूत करता है।

 

मन पर अक्सर दो प्रकार का प्रभाव होता है 

एक सकारात्मक दूसरा नकारात्मक सकारात्मक प्रभाव वाले लोग अच्छे होते है। उनके अंदर ज्ञान होता है  उनका सोच समझ विचार कल्पना सब संतुलित होते है। वे कभी कल्पनातीत नहीं होते है सकारात्मक ब्यक्ति के बात विचार करने का ढंग सौम्य होता है  जो सबको अच्छा लगता है। 

 

जिनके मन में नकारात्मक प्रबृत्ति होता है  

ऐसे ब्यक्ति के मन एक जगह नहीं ठहरते है  उनके मन बिचलित रहते है  ऐसे ब्यक्ति अपने मन के पीछे भागता है  मन जैसा करता  है  उस और भागता है ऐसे ब्यक्ति के मन पर कोई नियंत्रण नहीं होता है  इसके पीछे मुख्या कारण है  ज्यादाकर कल्पनातीत रहना  जो कभी पूर्ण हो नहीं सकता है  उस विषय या कार्य के बारे में ज्यादा सोच विचार कल्पना करना  इससे बुद्धि विवेक कमजोर रहता है।   

मन में हमेशा उथल पुथल रहता है ऐसे ब्यक्ति ज्यादा तर्क वितर्क करता है 

स्वाभाविक है ज्यादा तर्क वितर्क से बनाबे वाला काम भी बिगड़ सकता है  किसी भी काम में सफलता या परिणाम तक पहुंचने के लिए सटीक सोच की आवश्यकता होता है जब कोई काम समझ कर करने पर भी पूरा नहीं होता है तो स्वाभाविक है  तर्क वितर्क उत्पन्न ही होगा  इसलिए मन में नकारात्मक प्रबृत्ति कभी नहीं होनी चाइये।   

  

बहुत ज्यादा सोचना या कल्पना करना भी उचित नहीं होता है 

इससे मन के भाव में बहुत फड़क पड़ता है  भले सरे सोच सकारात्मक ही क्यों न हो  सोच विचार के साथ किया गया कल्पना ही फलित होता है  बहुत जायदा सोचना या कल्पना करने से मस्तिष्क के साथ साथ मन पर भी बहुत असर होता है  जिससे स्वस्थ भी ख़राब हो सकता है  ऐसा तब होता है  जब सूझ बुझ कर किया गया कार्य या किसी विषय पर निर्णय के वजह से वह सब  ख़राब  हो जाता है  जिससे बर्बादी का कारण बन जाता है नाम मन मर्यादा प्रतिष्ठा सब  दाव पर लग जाता है 

जब की इस बर्बादी के पीछे कारण कुछ और होता है  उस समय जो सोच समझ या कल्पना में विचार कुछ नही हो पता है  बहुत सोच विचार करने पर भी कोई जवाब नहीं मिल पता है  तब लोग कुछ गलत कदम भी उठा लेते है  जिनके मनोबल कमजोर होता है  जिनके पास आत्मबल और मनोबल मजबूत होता है  उनके मन पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ता है।     

जीवन की सुंदरता में उच्च ब्यक्तित्व की पहचान में मन के ज्ञान का पहचान बड़ा स्थान रखता है

  

जीवन के वास्तविक सुंदरता

जीवन में वास्तविक सुंदरता पुरुषार्थ के आने के साथ ही नजर आता है।

तन की सुंदरता उनके आकर्षण को दर्शाता है।

ब्यक्ति की पहचान और रुतवा कितना बड़ा है। 

आकर्षक होने से लोग उनके तरफ आकर्षित हो रहे है। 

ब्यक्ति को बाहरी दिखावे पर अवस्य ध्यान देना चाहिये। 

व्यक्तित्व उनके रुतवा को दर्शाता है।  जितना साफ सुथरा परिवेश होता है।

व्यक्तित्व का रुतवा उतना ही आकर्षण को दर्शाता है। 

मन के साफ होने से उच्च ब्यक्तित्व की पहचान

अपने मन के साफ होने अछे ब्यक्तित्व की पहचान होता है।

मन जितना साफ़ होता है। जीवन में सरलता और सहजता उतना ही बढ़ता जाता है। 

मन से साफ होने से अनगिनत फयदे है। 

लोगो के किसी भी प्रकार के बात विचार का असर मन पर नहीं होता है।

कोई भी बात विचार सूझ बुझ समझदारी से होता है। 

बात विचार का प्रभाव  लोगो पर पड़ता है। 

लोगो के बिच में सौहार्द्र बढ़ता है। लोग आत्मीयता से जुड़ते  है। 

मन के साफ होने से मन में सारलता निवास होता है।

जिससे लोगो के बात विचार को समझने की क्षमता होता है।

लोगो के बात विचार का उचित निर्णय लेने में मन सक्षम होते है। 

अपने जीवन की सुंदरता करुणा, सरलता, सहजता में बहुत बड़ा स्थान

जीवन की सुंदरता में करुणा का भी बहुत बड़ा स्थान है।

मन में करुणा का भाव होने से तन मन की सुंदरता चरितार्थ होता है।

करुणा बच्चो के प्रति माता का प्यार दुलार बहुत होता है।

ऐसे स्वभाव के ब्यक्ति के बात विचार आकर्षक और मोहक होते है।

करुणा के स्वभाव से ब्यक्ति का मन बहुत साफ सुथरा होता जाता है। 

ब्यक्तित्व का स्तर बहुत उच्च होता है। 

जीवन के उन्नति में परोपकार, उदारता, दयावान, दानशीलता, दयावान, सत्कर्म है 

जीवन के उन्नति में परोपकार, उदारता, दयावान, दानशीलता, से बड़ा कर्म सायद ही कोई हो।

जिनके मन में परोपकार की भावना होते है।  

उदारता के गुण ब्यक्ति के जीवन में दुसरो के प्रति बहुत अनुराग उत्पन्न करता है।

दयावान, दानशीलता जैसे गुण वाले ब्यक्ति सदा दुसरो के अच्छाई के लिए ही कर्म करते है।

ऐसा समझे की उनका सबकुछ दुसरो के लिए ही होता है।

किसी के भी दुःख तकलीफ पड़ेशानी में सदा साथ देते है। ऐसे ब्यक्ति के भावना सदाचारी होते है।  

  जीवन की सुंदरता 

जीवन की आधारशिला माता पिता ही बच्चो के पालक माता पिता है भले सांसारिक ज्ञान में कोई न कोई मतभेद उसको अपने माता पिता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है।

  

जीवन के आधारस्तम्भ जीवन की आधारशिला

जीवन की आधारशिला माता पिता ही होते है।

बच्चो के पालक माता पिता ही होते है।

भले सांसारिक ज्ञान में कोई न कोई मतभेद हो।

उसको अपने माता पिता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है।

बड़े और गुरुजन भी मदत करते है। ज्ञान कभी भी छुपा नहीं रहता है।

जैसा हाल जैसा माहौल हो तो धोखे खा कर भी लोग सीखते है।

इसलिए जीवन ही एक संघर्ष है।

माता पिता के द्वारा शिक्षा ज्ञान जीवन की आधारशिला

बच्चे जन्म से ही माता पिता के लाडले होते है।

उनका भरण पोषण माता पिता करते है ये तो जगत विख्यात है।

सिर्फ भरण पोसन ही नहीं उनका देखभाल छोटे से बड़ा होना।

घरेलु शिक्षा फिर पाठशाला में शिक्षा सब में हर जगह माता पिता के ही देख रेख में होते है।

भले ही पाठशाला के ज्ञान का माध्यम अध्यापक हो भूमिका तो माता पिता के ही है।

आगे चलकर उच्च महा विद्यालय की पढाई पूरा करवाना।

जब तक की कही नौकरी धंदा नही लग जाता है। तब तक हर प्रकार से देख रेख माता पिता का ही होता है।

बच्चो के लिए माता पिता का संघर्ष

संघर्ष भरे माता के जीवन में क्या क्या बीतता है। किस किस रस्ते से गुजर कर। ये सभी इच्छाएं माता पिता पूर्ति करते है। कभी कभी ऐसे हालात भी होते है। जिसका अपने बच्चो को किसी प्रकार का शिक्षा और ज्ञान में व्यवधान नहीं आने देते है। हर बुरे हालत कों स्वयं पर झेलते है। अपने बच्चो को रत्ती भर भी तकलीफ नहीं होने देते है। ये सभी क्या है? संघर्ष ही तो है। संघर्ष तो जीवन जीने के लिए हर किसी को करना पड़ता है।

होनहार बच्चे का संघर्ष

संघर्ष तो उस होनहार बच्चे के लिए भी है। जो ज्ञानी और समझदार बच्चे है। माता पिता के दिए हुए ज्ञान से उनका आत्मज्ञान आत्मबल बढ़ता है। जिससे आगे चलकर अपने पढाई लिखाई में दिन रात मेहनत कर के आगे बढ़ते है। इससे ज्ञान तो बढ़ता ही है। मन की एकाग्रता का निर्माण होता है। मन की एकाग्रता से जीवन को सरल और सहज करने में बहुत मदत मिलता है।

जीवन की सरलता और सहजता के मुख्य द्वार एकाग्रता ही है। किसी एक माध्यम में गुजर बसर से मिलता है। संघर्ष के लिए एकाग्रता का जीवन में होना बहुत महत्त्व है। एकाग्रता जीवन में स्थापित हो जाए। तो चाहे जितनी भी मुसीबत या परेशानी जीवन आता है। उस ब्यक्ति के मानसिकता में कोई फड़क नहीं पड़ता है। अपने उद्देश्य पर सजग हो कर चलते ही रहता है। अपने जीवन का निर्वाह करते रहता है। संघर्ष भरे जीवन के ये पहचन है।

   जीवन की आधारशिला 

जीवन का अस्तित्व मव सक्रिय कल्पना से मन सकारात्मक है तो ब्यक्ति के बुद्धिमान होने से सोच समझ सकारात्मक ही होंगे

  

जीवन का अस्तित्व में सक्रिय कल्पना 

सक्रिय कल्पना मे अपने जीवन का अस्तित्व में कल्पना के संसार में मनुष्य का जीवन का अस्तिव कल्पना के संसार में मनुष्य का जीवन पनपता है। 

कल्पना चाहे छोटा हो या बड़ा हर कोई कल्पना के संसार में विचरण करता है। 

कल्पना के अनुरूप अपना कार्य करता है। 

जीवन में आवश्यक कार्य के लिए चिंतन करता है। कार्य के प्रति सक्रीय रहता है। 

जीवन में सक्रियता तो देता ही है। साथ में मन मस्तिष्क को भी सक्रीय बनाये रखता है।

चुस्ती फुर्ती से कल्पना सक्रीय होता है। 

जीवन की सक्रियत रहने के लिए सबसे पहले शरीरमनबुद्धिविवेक का  सक्रीय होना जरूरी है।

 शरीर चुस्त दुरुस्त रहेगा तो मन में भरपूर सकारात्मक ऊर्जा होगा। 

मन सकारात्मक होगा तो ब्यक्ति बुद्धिमान बनेगा। 

बुद्धिमान ब्यक्ति के सोच समझ सकारात्मक ही होंगे। 

लिहाजा ऐसे ब्यक्ति के कल्पना भी सक्रीय होगे। 

जीवन का अस्तीत्व में सक्रीय कल्पना तब ज्यादा फायदेमंद जब वो सकारात्मक हो

जीवन का अस्तीत्व सक्रीय कल्पना तब ज्यादा फायदेमंद होता है जब ब्यक्ति उस तरफ पुरे मन से कार्य करता है ऐसा न हो की कल्पना का संसार बना लिए और कार्य के नाम पर कुछ नहीं किये तब कल्पना का दुश्य परिणाम ही निकलता है कल्पना वही तक सही है जहा तक कल्पना के अनुरूप कार्य करे कल्पना कोई भी हो बहुत सक्रीय होते है  कल्पना का पूरा प्रभाव मन और मस्तिष्क पर पड़ता है यदि कल्पना के अनुसार सक्रीय हो कर कल्पना से जुड़े कार्य में ब्यस्त है तो इससे सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा सक्रीय कार्य समय पर पूरा होगा

कल्पना के अनुसार कार्य में सक्रियता नहीं है तो मन सुस्त होने लगेगा

मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा बाद में मन भी नकारात्मक होने लग जायेगा सक्रियता सकारात्मकता को बढ़ाता है  सुस्तपना नकारात्मक प्रबृति है कार्यहीनता भी नकारात्मक प्रबृति है कर्महिनाता से बिलकुल बचकर रहना चाहिये  मस्तिष्क ऊर्जा का क्षेत्र है मस्तिस्क मन से प्रभावित होता है मन का लगना सकारात्मक प्रबृति है मन का किसी कार्य में नहीं लगना नकारात्मक प्रबृति है

कल्पना सक्रीय है जब कल्पना सक्रीय होता है

तब मन भी सक्रीय होता है परिणाम मस्तिष्क में दिमाग भी सक्रीय होता है मन सुस्त पड़ गया तो जरूरी नहीं की कल्पना और दिमाग भी सुस्त पड़ेगा वो चलता ही रहेगा मनुष्य सचेतन में रहता है जिसे सचेत मन कहते है कल्पना अवचेतन मन की प्रकृति है अवचेतन मन का संपर्क अंतरमन से है सचेत मन सक्रीय नहीं रहा तो अचेतन को बढ़ा देगा जो नकारात्मक प्रबृति है

सक्रिय कल्पना  मे मस्तिष्क में दिमाग के दो भाग होते है

ऊर्जा की दृस्टि से समझा जाए तो दिमाग में दो प्रकार के ऊर्जा का प्रवाह होता है जिसे सकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक ऊर्जा कहते है मन के स्वभाव से ऊर्जा कार्य करता है मन की जैसी प्रकृति होगा ऊर्जा वैसा कार्य करेगा मन और उर्जा का संगम होता है इसलिए मन सदा सकरात्मक होन चाहिए।

  सक्रिय कल्पना 

जीवन और मन के लिए सफल जीवन के लिए बुद्धि विवेक का प्रभाव मन पर पड़ना चाहिए

  

जिंदगी जीवन और मन की सच्चाई है.

कल्पना मन का श्रोत है. मन कुछ और कहता है पर जीवन जिम्मेदारी का नाम है.

संघर्स जीवन के लिए है. जब की मन ख्याली पुलाव खाते रहता है.

दिन रात मेहनत करना चाहता है पर मन उसे ऐसा करने से रोक भी सकता है.

जीवन सच्चाई यथार्थ ही होता है पर मन आडम्बर भी कर सकता है.

 

जीवन के जरीय मन को नियंत्रित किया जा सकता है.

मन के जरिये चल रहे जीवन में परिवर्तन करना आसन नहीं होता है.

मन का संसार आज तक कोई नहीं समझ पाया है.

जीवन को समझने का प्रयास करे तो मन जरूर समझ में आने लग जाता है.

 

जीवन का सच्चा मददगार बुद्धि विवेक ही होता है.

अपना मन चाहे जितना सोचे पर कार्य तो जीवन में बुद्धि विवेक से ही करना चाहिए. समृद्धि के लिए मन को जीवन के अनुसार ही चलाना चाहिए. ज्यादा मन का बढ़ना समृद्धि के रास्ते में रोरा भी अटका सकता है. जीवन का सफल संघर्स तो मन पर नियंत्रण पाना ही होता है. जीवन के उत्थान के लिए मन पर नियंत्रण बहूत जरूरी है.

 

मन को उस ओर जरूर व्यस्त रखे जो जीवन यापन में कार्य कर रहे है.

मन लगाकर कार्य करना और अपने अस्तित्व को बनाये रखने में बुद्धि विवेक हर जगह साथ देता है. जीवन में कभी भी ऐसा कुछ नहीं करे की जिससे बुद्धि विवेक में कोई विकार आये. मन का भरोसा नहीं करना चाहिए, मन का तो आकर, विकार और निराकार भी होता है. पर जीवन के लिए बुद्धि विवेक एक आधार स्तम्भ होता है.

 

सफल जीवन के लिए बुद्धि विवेक का प्रभाव मन पर पड़ना चाहिए.

ऐसा कभी नही हो की मन का प्रभाव बुद्धि विवेक पर पड़े. मन स्वयं का अपना होता है पर जीवन के अंश बहूत लोगो से जुड़ा होता है जिससे जीवन चलता है. जीवन के उत्थान और सफलता के लिए बुद्धि विवेक को सक्रीय करना ही अच्छा है. 

जीवन और मन

जीवंत कल्पना जीवन के विकास के लिए कुछ योजना वर्त्तमान में क्या चल रहा बिता हुआ समय कैसा आने वाला भविष्य कैसा हो तरक्की उन्नति और विकास कैसे हो?

  

जीवंत कल्पना खुशहाल जीवन के कल्पना में मनुष्य अपने अस्तित्व में आना

खुशहाल जीवन के कल्पना में।  जब मनुष्य अपने अस्तित्व में आता है। 

अपने जीवन के विकास के लिए कुछ योजना बनता है।

वर्त्तमान में क्या चल रहा है। बिता हुआ समय कैसा था

आने वाला भविष्य कैसा होगा?

तरक्कीउन्नति और विकास कैसे हो?

जब ब्यक्ति ऐसा कुछ विचार कर के सोचता है। 

भविष्य के जीवन के लिए खुशहाली की कामना करता है।

मनुष्य को करना ही चाहिये।

जब तक मनुष्य सोचेगा नहीं तब तक कुछ करने का भावना जागेगा नहीं।

सोचना कल्पना करना किसी निर्माण के बुनियाद से काम नहीं होता है।

जीवंत कल्पना में युवावस्था में अक्सर लोग जीवन में आकर्षण के लिए जीवंत कल्पना करते है

युवावस्था में अक्सर लोग सकारात्मक सोच रखते है। जीवन में आकर्षण के लिए खासकर ऐसे युवा जीनके कोई प्रेमिका हो प्रसन्नचित मन के लिए  युवा जीवंत कल्पना करते है।  हालाकि कल्पना की दृस्टि से देखा जाए। तो उचित नहीं है। सोच समझ और कल्पना में जितना मनुष्य सरल और सहज हो कर संतुलित कल्पना करेगा।  उतना ही अच्छा है।  मन को  मनोरंजक करना। उतना ही तक ठीक है। बस वो कल्पना हो। कल्पनातीत नही होना चाहिए। क्योकि ये सब के दायरे में ही आते है। बहुत ज्यादा सक्रीय होते है। बहुत तेज गति से दिल और दिमाग पर प्रभाव डालते है।

अपने मनदिलदिमागविवेकबुद्धिसोचसमझ के विकास और संतुलन के लिए करे तो  उपयोगी है।  जिस विषय या कार्य पर सक्रिय होते है। कार्य की सफलता के लिए। जब सक्रीय हो कर विचार करते है। 

मनुष्य को करना ही चाहिये। जब तक मनुष्य सोचेगा नहीं तब तक कुछ करने का भावना जागेगा नहीं। सोचना कल्पना करना किसी निर्माण के बुनियाद से काम नहीं होता है।

युवावस्था में अक्सर लोग सकारात्मक सोच रखते है। जीवन में आकर्षण के लिए खासकर ऐसे युवा जीनके कोई प्रेमिका हो प्रसन्नचित मन के लिए  युवा जीवंत कल्पना करते है।

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