श्री रंगनाथस्वामी मंदिर परिसर में स्थित प्रमुख मंदिरों की जानकारी
श्रीरंगम का रंगनाथस्वामी मंदिर केवल एक गर्भगृह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विशाल मंदिर-नगर (Temple City) है। इसके सात प्राकारों (परकोटों) के भीतर अनेक देवी-देवताओं, आचार्यों और उपदेवताओं के अलग-अलग मंदिर एवं सन्निधियाँ स्थापित हैं। नीचे मंदिर परिसर में स्थित प्रमुख मंदिरों/सन्निधियों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है:
श्री रंगनाथ (मुख्य गर्भगृह)
यह मंदिर परिसर का केंद्र है। यहाँ भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। यह स्वरूप सृष्टि-संरक्षण और योगनिद्रा का प्रतीक है। सभी प्राकार इसी गर्भगृह के चारों ओर विकसित हुए हैं।
श्री रंगनायकी (महालक्ष्मी) मंदिर
यह मंदिर भगवान रंगनाथ की दिव्य संगिनी देवी लक्ष्मी को समर्पित है।
यह स्वतंत्र गर्भगृह वाला मंदिर है
श्रीवैष्णव परंपरा में देवी रंगनायकी को करुणा और शरणागति की अधिष्ठात्री माना जाता है
कई अनुष्ठान पहले देवी को अर्पित किए जाते हैं, फिर भगवान को
श्री रामानुजाचार्य सन्निधि
यह सन्निधि श्रीवैष्णव संप्रदाय के महान आचार्य रामानुजाचार्य को समर्पित है।
यहाँ रामानुजाचार्य की संरक्षित देह (थिरुमेनी) आज भी विराजमान मानी जाती है
विशिष्टाद्वैत वेदांत का यही प्रमुख केंद्र है
वैष्णव श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र स्थल
श्री अंडाल (गोदा देवी) मंदिर
यह मंदिर अंडाल देवी को समर्पित है, जो आलवार संतों में एकमात्र महिला संत थीं।
अंडाल देवी को भगवान विष्णु की अनन्य भक्त और दिव्य पत्नी माना जाता है
मार्गशीर्ष और पंगुनी मास में विशेष उत्सव होते हैं
वैकुण्ठ एकादशी से जुड़ी परंपराओं में इस सन्निधि का विशेष महत्व है
श्री नरसिंह (नृसिंह) मंदिर
यह मंदिर भगवान नरसिंह अवतार को समर्पित है।
भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म के नाश का प्रतीक
भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए विशेष पूजन
श्री कृष्ण मंदिर
यह सन्निधि भगवान कृष्ण के बाल एवं गोपाल स्वरूप को समर्पित है।
यहाँ श्रीकृष्ण को भक्तवत्सल और लीलाधारी रूप में पूजा जाता है
जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन होते हैं
श्री राम (राम-लक्ष्मण-सीता) सन्निधि
यह मंदिर भगवान राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण को समर्पित है।
रामायण परंपरा से जुड़ा यह स्थल अत्यंत पूजनीय है
मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन का प्रतीक
श्री गरुड़ मंदिर
यह सन्निधि भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ को समर्पित है।
गरुड़ सेवा वैष्णव परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है
ब्रह्मोत्सव और उत्सव यात्राओं में गरुड़ की विशेष भूमिका होती है
श्री हनुमान सन्निधि
यहाँ हनुमान जी को बल, भक्ति और सेवा के प्रतीक रूप में पूजा जाता है।
रामभक्त हनुमान के दर्शन से साहस और आत्मबल की प्राप्ति मानी जाती है
अन्य उपदेवता और सन्निधियाँ
मंदिर परिसर में इसके अतिरिक्त भी कई सन्निधियाँ स्थित हैं, जैसे—
सूर्य देव
चंद्र देव
नवग्रह
विभिन्न आलवार संतों की सन्निधियाँ
मंदिर परिसर का धार्मिक महत्व
यह परिसर वैष्णव भक्ति का जीवंत केंद्र है
प्रत्येक सन्निधि भक्ति, दर्शन और आचार परंपरा से जुड़ी हुई है
एक ही परिसर में विष्णु के अनेक रूपों और उनके भक्तों का दर्शन दुर्लभ माना जाता है
निष्कर्ष
श्री रंगनाथस्वामी मंदिर परिसर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि अनेक मंदिरों का समन्वित तीर्थ है। यहाँ प्रत्येक सन्निधि अपने-अपने आध्यात्मिक अर्थ और परंपरा के साथ श्रद्धालुओं को भक्ति, शरणागति और शांति का अनुभव कराती है। यही कारण है कि श्रीरंगम को वैष्णव जगत का हृदय कहा जाता है।