कार्तिक अमावस्या से देव दीपावली तक: प्रकाश और भक्ति का दिव्य पर्व
प्रस्तावना
सनातन धर्म के सभी पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन के आध्यात्मिक सत्य का उत्सव हैं। इनमें सबसे उज्ज्वल पर्व है — दीपावली, जो कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है, और इसका दिव्य समापन होता है कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली देव दीपावली से।
जहाँ कार्तिक अमावस्या पर हम पृथ्वी पर लक्ष्मी और गणेश की आराधना करते हैं, वहीं कार्तिक पूर्णिमा पर देवता स्वयं धरती पर अवतरित होकर गंगा तटों पर दीप जलाते हैं। इसीलिए इसे देवों की दीपावली कहा जाता है।
वर्ष 2025 में देव दीपावली 5 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन का पूजन काल सायं 5:15 बजे से 7:50 बजे तक रहेगा।
यह पर्व न केवल बाह्य दीपों का है, बल्कि आत्मा में बसे अंधकार को दूर करने और भीतर के प्रकाश को जागृत करने का भी प्रतीक है।
कार्तिक मास का पवित्र महत्व
कार्तिक मास को सनातन धर्म में सबसे पुण्यकारी महीना माना गया है। इसे भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव — तीनों का प्रिय मास कहा गया है।
"कार्तिकं नाम मासानां सर्वपापप्रणाशनम्।"अर्थात् — कार्तिक मास पापों का नाश करने वाला है।
इस महीने में स्नान के बाद दीपदान करना, तुलसी पूजन, हरिनाम-संकीर्तन, कथा-श्रवण आदि का अत्यंत महत्व है।
कार्तिक अमावस्या पर दीपावली
दीपावली, जिसे “अमावस्या की रात्रि में प्रकाशित होने वाला पर्व” कहा गया है, पाँच दिवसीय महोत्सव है। यह पर्व अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान और निराशा से आशा की ओर अग्रसर होने का प्रतीक है।
माता लक्ष्मी की आराधना
कार्तिक अमावस्या की रात्रि को माता लक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन होता है। कहा जाता है कि इस दिन माता अपने भक्तों के घरों में प्रवेश करती हैं जहाँ स्वच्छता, पवित्रता और प्रकाश होता है।
इसलिए इस दिन
- घर की सफाई की जाती है,
- दीप जलाए जाते हैं,
- दरवाजों पर रंगोली बनाई जाती है,
- और माँ लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीपों की पंक्तियाँ सजाई जाती हैं।
भविष्य पुराण में लिखा है —
“दीपप्रज्वालनेन लक्ष्मीः प्रीयते, तमो नश्यति।”अर्थात् — दीप जलाने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अंधकार का नाश होता है।
भगवान गणेश की पूजा
दीपों का दार्शनिक अर्थ
दीप केवल मिट्टी का नहीं, जीवन का प्रतीक है।
- दीप का तेल — हमारी आस्था है।
- दीप की बाती — हमारा मन।
- दीप की लौ — हमारा ज्ञान।
जब हम दीप जलाते हैं, तो यह केवल एक दीप नहीं जलता — यह हमारे भीतर के अंधकार, भय और मोह को मिटाने का संकल्प होता है।
भगवद्गीता कहती है —
“तमसो मा ज्योतिर्गमय।”— अर्थात् “मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।”
दीपावली इसी मंत्र का सजीव रूप है।
भगवान राम का अयोध्या आगमन
१४ वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के उपरांत जब श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे, तब अयोध्यावासियों ने तेल के दीप जलाकर उनका स्वागत किया।
देव दीपावली की उत्पत्ति
देव दीपावली कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, अर्थात् दीपावली के १५ दिन बाद।
तभी से इस दिन को देवों की दीपावली कहा जाने लगा।
काशी की देव दीपावली — जहाँ देव उतरते हैं धरती पर
रात्रि में जब दीप हवा में झिलमिलाते हैं और गंगा आरती होती है, तो यह दृश्य मानो पृथ्वी पर स्वर्ग का अनुभव कराता है।
देवताओं का पृथ्वी पर आगमन
पूजा विधि एवं 2025 का मुहूर्त
पूजन विधि
- प्रातः गंगा या किसी पवित्र जल में स्नान करें।
- घर में गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धि करें।
- भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करें।
- दीप जलाएं — कम से कम 21 दीप गंगा या तुलसी के समीप रखें।
- “ॐ नमः शिवाय” या “हर हर गंगे” का जप करें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दीपदान करें।
- दीपदान का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में कहा गया है —
“दीपदानं महादानं पावनं सर्वकामदम्।”अर्थात् — दीपदान सबसे पवित्र और सर्वसिद्धि प्रदान करने वाला दान है।
दीपदान से आत्मा निर्मल होती है, मन में पवित्रता आती है, और जीवन के अंधकार मिट जाते हैं।
मानव जीवन में प्रकाश पर्व का संदेश
दीपावली और देव दीपावली केवल त्योहार नहीं — ये आध्यात्मिक यात्रा के दो चरण हैं।
- दीपावली — बाहरी जगत में प्रकाश फैलाने की प्रेरणा देती है।
- देव दीपावली — भीतर के जगत में दिव्यता जागृत करने का आह्वान करती है।
दीपावली हमें सिखाती है कि
“अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दीपक उसे मिटाने के लिए पर्याप्त है।”
और देव दीपावली कहती है —
“जब आत्मा प्रकाशित हो जाती है, तो स्वयं देवता आपके जीवन में दीप जलाने आते हैं।”
भक्ति और विज्ञान का संगम
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
उपसंहार — प्रकाश का सन्देश
अंतिम प्रार्थना
“हे माँ लक्ष्मी, हे प्रभु विष्णु, हे महादेव —हमारे जीवन से अज्ञान का अंधकार मिटाओ,और हमें आत्मा के प्रकाश से प्रकाशित करो।हमारे हर घर, हर मन और हर आत्मा मेंदिव्यता का दीप प्रज्वलित हो जाए।”
निष्कर्ष
हर हृदय में ज्योति प्रज्वलित हो — यही देव दीपावली का सच्चा अर्थ है।
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