फिल्ट्रेशन (रेत फिल्टर / कार्बन फिल्टर):
जल शोधन का महत्वपूर्ण चरण
सीवेज
ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में गंदे
पानी को शुद्ध
करने की प्रक्रिया
कई चरणों में
पूरी की जाती है। प्रारम्भिक
चरणों में स्क्रीनिंग,
ग्रिट चैंबर और
सेडिमेंटेशन टैंक के
माध्यम से बड़े ठोस पदार्थ
और भारी कणों
को हटाया जाता
है। इसके बाद
एरेशन टैंक और बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट के
द्वारा पानी में
मौजूद जैविक प्रदूषकों
को सूक्ष्म जीवों
की सहायता से
कम किया जाता
है। जब ये प्रक्रियाएँ पूरी हो जाती हैं,
तब भी पानी में बहुत
छोटे कण, सूक्ष्म
अशुद्धियाँ, रंग, गंध
और कुछ घुले
हुए पदार्थ मौजूद
रह सकते हैं।
इन सूक्ष्म अशुद्धियों
को हटाने के
लिए जिस प्रक्रिया
का उपयोग किया
जाता है उसे फिल्ट्रेशन कहा जाता
है।
फिल्ट्रेशन
जल शोधन का एक महत्वपूर्ण
और प्रभावी चरण
है जिसमें पानी
को विशेष प्रकार
के फिल्टर माध्यमों
से गुजारा जाता
है। इन माध्यमों
में सामान्यतः रेत,
बजरी, सक्रिय कार्बन
और अन्य फिल्टर
सामग्री का उपयोग
किया जाता है।
जब पानी इन परतों से
होकर गुजरता है,
तो उसमें मौजूद
सूक्ष्म कण, गंदगी
और अशुद्धियाँ इन
माध्यमों में फंस
जाती हैं और अपेक्षाकृत साफ पानी
आगे की ओर निकल जाता
है। इस प्रकार
फिल्ट्रेशन प्रक्रिया पानी की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर
बनाती है।
फिल्ट्रेशन
प्रक्रिया मुख्य रूप
से दो प्रकार
के फिल्टरों के
माध्यम से की जाती है—रेत फिल्टर
(Sand Filter) और कार्बन फिल्टर
(Carbon Filter)। ये दोनों
फिल्टर अलग-अलग प्रकार की
अशुद्धियों को हटाने
में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाते हैं।
रेत
फिल्टर में मुख्य
रूप से महीन रेत, बजरी
और कंकड़ की
कई परतें होती
हैं। इन परतों
को इस प्रकार
व्यवस्थित किया जाता
है कि ऊपर की परत
में महीन रेत
होती है और नीचे की
ओर अपेक्षाकृत मोटे
कणों वाली बजरी
होती है। जब पानी इन
परतों से गुजरता
है, तो उसमें
मौजूद छोटे ठोस
कण, गाद और अन्य अशुद्धियाँ
रेत की परतों
में फंस जाती
हैं। इस प्रक्रिया
के कारण पानी
अधिक साफ और पारदर्शी हो जाता है। रेत
फिल्टर को जल शोधन की
पारंपरिक और अत्यंत
प्रभावी तकनीक माना
जाता है।
रेत
फिल्टर की कार्यप्रणाली
मुख्य रूप से भौतिक सिद्धांतों
पर आधारित होती
है। जब पानी फिल्टर के
ऊपर से नीचे की ओर
बहता है, तो उसमें मौजूद
कण रेत की सतह पर
और उसके बीच
की जगहों में
फंस जाते हैं।
धीरे-धीरे यह परत एक
प्राकृतिक फिल्टर की
तरह कार्य करने
लगती है और पानी को
अधिक प्रभावी ढंग
से शुद्ध करती
है। कुछ समय बाद जब
रेत की परतों
में अधिक मात्रा
में गंदगी जमा
हो जाती है,
तो फिल्टर की
सफाई आवश्यक हो
जाती है। इस सफाई प्रक्रिया
को बैकवॉशिंग कहा
जाता है जिसमें
पानी को विपरीत
दिशा में प्रवाहित
करके जमा हुई गंदगी को
बाहर निकाल दिया
जाता है।
कार्बन
फिल्टर जल शोधन का एक
और महत्वपूर्ण माध्यम
है। इसमें मुख्य
रूप से सक्रिय
कार्बन (Activated Carbon) का उपयोग
किया जाता है।
सक्रिय कार्बन एक
विशेष प्रकार का
पदार्थ होता है जिसकी सतह
बहुत अधिक छिद्रयुक्त
होती है। इन सूक्ष्म छिद्रों के
कारण इसकी सतह
क्षेत्रफल बहुत अधिक
होता है, जिससे
यह पानी में
मौजूद अनेक प्रकार
के रासायनिक पदार्थों,
रंग और गंध को अवशोषित
कर सकता है।
जब
पानी कार्बन फिल्टर
से होकर गुजरता
है, तो उसमें
मौजूद क्लोरीन, कार्बनिक
यौगिक, रंग, गंध
और कुछ रासायनिक
प्रदूषक सक्रिय कार्बन
की सतह पर चिपक जाते
हैं। इस प्रक्रिया
को एडसॉर्प्शन (Adsorption) कहा
जाता है। इस प्रकार कार्बन
फिल्टर पानी की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर
बनाता है और उसे अधिक
स्वच्छ तथा उपयोग
के योग्य बनाता
है।
रेत
फिल्टर और कार्बन
फिल्टर दोनों मिलकर
जल शोधन प्रक्रिया
को अधिक प्रभावी
बनाते हैं। रेत
फिल्टर मुख्य रूप
से भौतिक अशुद्धियों
को हटाने का
कार्य करता है,
जबकि कार्बन फिल्टर
रासायनिक अशुद्धियों, रंग और गंध को
हटाने में सहायता
करता है। इन दोनों प्रक्रियाओं
के बाद पानी
काफी हद तक साफ और
स्वच्छ हो जाता है।
फिल्ट्रेशन
प्रक्रिया का पर्यावरणीय
महत्व भी अत्यंत
अधिक है। जब पानी को
इस चरण से गुजारा जाता
है, तो उसमें
मौजूद सूक्ष्म कण
और प्रदूषक कम
हो जाते हैं।
इससे अंतिम उपचार
प्रक्रिया अधिक प्रभावी
हो जाती है और पानी
को सुरक्षित रूप
से पुनः उपयोग
के लिए तैयार
किया जा सकता है। कई
स्थानों पर फिल्ट्रेशन
के बाद पानी
का उपयोग बागवानी,
शौचालय फ्लशिंग, औद्योगिक
शीतलन और अन्य कार्यों में किया
जाता है।
फिल्ट्रेशन
प्रणाली का सही संचालन और
रखरखाव भी बहुत आवश्यक होता
है। यदि फिल्टर
माध्यमों में अधिक
मात्रा में गंदगी
जमा हो जाए और उन्हें
समय पर साफ न किया
जाए, तो पानी का प्रवाह
बाधित हो सकता है और
फिल्टर की क्षमता
कम हो सकती है। इसलिए
समय-समय पर बैकवॉशिंग और फिल्टर
मीडिया की जाँच की जाती
है। आवश्यकता पड़ने
पर रेत या सक्रिय कार्बन
को बदल भी दिया जाता
है।
आधुनिक
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
में फिल्ट्रेशन तकनीक
को और अधिक उन्नत बनाने
के लिए कई नई प्रणालियों
का उपयोग किया
जा रहा है। उदाहरण के
लिए प्रेशर सैंड
फिल्टर, मल्टीमीडिया फिल्टर
और ग्रेन्युलर एक्टिवेटेड
कार्बन फिल्टर जैसी
तकनीकों का प्रयोग
किया जाता है।
ये प्रणालियाँ अधिक
कुशलता से पानी को शुद्ध
करती हैं और कम समय
में बेहतर परिणाम
देती हैं।
फिल्ट्रेशन
का एक महत्वपूर्ण
लाभ यह भी है कि
यह पानी की पारदर्शिता को बढ़ाता
है। जब पानी में मौजूद
सूक्ष्म कण हट जाते हैं,
तो पानी अधिक
साफ दिखाई देता
है। यह विशेष
रूप से उन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण
होता है जहाँ पानी का
पुनः उपयोग किया
जाना होता है।
समग्र
रूप से देखा जाए तो
फिल्ट्रेशन सीवेज ट्रीटमेंट
प्लांट का एक महत्वपूर्ण और अंतिम
चरणों में से एक है
जो पानी को और अधिक
स्वच्छ बनाने में
सहायता करता है।
यह प्रक्रिया रेत
और सक्रिय कार्बन
जैसे प्राकृतिक माध्यमों
का उपयोग करके
पानी से सूक्ष्म
अशुद्धियों, रंग, गंध
और रासायनिक प्रदूषकों
को हटाती है।
अंततः
यह कहा जा सकता है
कि फिल्ट्रेशन जल
शोधन प्रणाली का
एक अनिवार्य भाग
है। यह प्रक्रिया
पानी की गुणवत्ता
को बेहतर बनाती
है और उसे पुनः उपयोग
के लिए सुरक्षित
बनाती है। यदि इस प्रणाली
को सही डिजाइन,
उचित संचालन और
नियमित रखरखाव के
साथ लागू किया
जाए, तो यह पर्यावरण संरक्षण, जल
संसाधनों के सतत
उपयोग और स्वच्छ
जल प्रबंधन में
महत्वपूर्ण योगदान दे
सकती है।