Friday, August 27, 2021

हम ज्ञान (Knowledge) साझा करने के माध्यम से सुधार करने या आगे बढ़ने के लिए क्या कार्रवाई कर सकता हूं?

ज्ञान (Knowledge)

मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है। जीवन के विकाश और उन्नति के लिए साथ में अपने ज्ञान के माध्यम से दूसरो को भी मार्गदर्शन करना चाहिए। जिससे ज्ञान का सही उद्देश्य पूरा हो।

 

हम ज्ञान (Knowledge) साझा करने के माध्यम से सुधार करने या आगे बढ़ने के लिए क्या कार्रवाई कर सकता हूं?

अपने ज्ञान के माध्यम से दूसरो को मदद जरूर करना चाहिए। ज्ञान है तो ज्ञान का प्रसार होना ही चाहिए। जो ब्यक्ति किसी कारण से कोई आभाव में कही फस रहा है। सबसे पहला कारन यही निकलता है की वो किस कारण से फसा रहा है। क्या उसे अपने कार्य या उद्देश्य का पूरा ज्ञान था? यदि नहीं था तभी फास गया है? ऐसे समय में हर ब्यक्ति अपने ज्ञान के माध्यम से उसको मदत कर के उसके ज्ञान के अभाव को दूर कर सके तो बहूत अच्छा है। अच्छा ज्ञान दूसरो को जरूर देना चाहिए। इससे परमात्मा खुश होते है। इससे अपना ज्ञान और बढ़ता है। मन लीजिये की आप ज्ञानी है। कोई ब्यक्ति आपसे कुछ अच्छा सलाह मांगे आया है। तो उसका मदत जरूर करिए।

समाज में ब्याप्त बुराई कलह को समाप्त करने के लिए लोगो को जागरूक कर के अच्छाई के लिए संघर्ष बहूत समाज सेवी संस्था कर रहे है। लोगो को बुराई से बचने के लिए अपने अपने ढंग से प्रचार प्रसार के माध्यम से प्रयास कर रहे है। ज्ञान साझा करने के माध्यम से सुधार करने या आगे बढ़ने के लिए प्रयास तो जरूर करना चाहिए। मन लीजिये की अपने पास कोई जानकारी के अभाव में कुछ बिगड़ रहा है? तो किसी अच्छे जानकर से विचार विमर्श जरूर करना चाहिए। उनके ज्ञान को प्रेरणा बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। कोई बच्चा, बुदुर्ग या कोई रास्ता पूछ रहा है। तो सही जानकारी बताइए, यदि जानकारी नहीं मालूम है। तो किसी से पूछकर उनको जरूर मदद करिए। भले उसमे आपका थोडा समय ब्यस्त हो रहा है। तो कोई बात नहीं है। राहगीर को कभी भी सही रास्ता बताइए तभी आपका ज्ञान सफल है। अक्सर देखा गया है। कोई राहगीर पूछता है? तो लोग सीधे बोल देते है। हमें मालूम नहीं ऐसा नहीं। ऐसा नहीं होना चाहिए। यदि वही पर किसी से विचार ले कर राहगीर को मदद कर देते है। तो ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। ज्ञान सदा दूसरो को मार्ग प्रदर्शन के लिए ही होता है। साथ में यदि किसी को किसी भी प्रकार के जानकारी की आवश्यकता है। तो संभव है तो जरूर मदद करना चाहिए।   







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यूकेजी (Ukg) और केजी (Kg) में प्रवेश के लिए कौन सा ज्ञान (Knowledge) आवश्यक है? भारतीय प्रणाली में ज्ञान की तुलना में प्रमाणपत्र क्यों महत्वपूर्ण हैं?

शिक्षा का ज्ञान  (Knowledge of education)

 

यूकेजी (ukg) और केजी (kg) में प्रवेश के लिए कौन सा ज्ञान (Knowledge) आवश्यक है?

यूकेजी और केजी में प्रवेश के  लिए  बच्चे को अपना नाम अपने माता पिता का नाम बताने आना चाहिए। किताबी किसी भी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है। क्योकि पढाई लिखाई की सुरुआत स्कूल से होते है। सिर्फ बच्चे के समझ का अंदाजा लगाया जाता है। क बच्चे को यूकेजी या केजी में प्रवेश लिया जाए। बच्चो को सिर्फ सब्जी की पहचान या फल का पहचान होना चाहिए। घर में उपयोग होने वाले वस्तु के पहचान होने ज़रूरी है। बच्चा कितना साफ़ बोल पाता है। बच्चे का उम्र ३ साल से बड़ा और ४ साल से छोटा है। तो इसके अनुसार से केजी में प्रवेश लिया जाता है। बच्चा यदि पहले से कुछ किताबी ज्ञान घर में पढ़ा है। जैसे A B C D शब्द या 1 2 3 गिनती सिखा है। छोटे साधारण कविता घर में दुसरे बड़े बच्चो से सिखा हो। उम्र ४ साल से बड़ा और ५ साल से छोटा है। यूकेजी में प्रवेश लिया जाता है। यूकेजी और केजी में प्रवेश के लिए इस प्रकार के ज्ञान की आवश्यकता होता है। मेरे हिसाब से बच्चा जब तक ५ साल का न हो उनके ऊपर पढाई का बोझ डालना ठीक नहीं है। आधुनिक सभ्यता बहूत जल्दी बच्चे पर पढाई का बोझ डाल रहा है। हो सके तो जब तक बच्चा यूकेजी या केजी में प्रवेश के पहले किसी भी प्रकार का किताबी ज्ञान का बोझ न डाला जाये। बच्चे मासूम होते है। बच्चे उम्र और सामान्य ज्ञान जो घर के वस्तु के नाम के ज्ञान के हिसाब से यूकेजी या केजी में प्रवेश होते है। न कि किसी किताबी ज्ञान के माध्यम से प्रवेश होते है। इसलिए बच्चे को स्कूल में प्रवेश के पहले किसी भी प्रकार का किताबी ज्ञान का बोझ न डाले। बच्चो को स्कूल जाने के पहले कुछ सिखाना चाह रहे है। तो सामान्य ज्ञान के तौर पर घर के बस्तु के नाम सिखा सकते है। इतने ही यूकेजी और केजी में प्रवेश के लिए ज्ञान आवश्यक है।   

 

काम के संदर्भ में कर्मचारियों को दिए जाने वाले सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान (Knowledge) का अर्थ है

सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान ब्यक्ति को जिम्मेदार बनता है। खास कर के काम के संदर्भ में कर्मचारियों को अपने सिद्धांत और व्यावहार में पक्का होना बहूत जरूरी है। सिद्धांत ब्यक्ति को समय पर अपने काम पर आना सिखाता है। मन लगाकर काम करना। काम के प्रति अपने जिम्मेदारी को समझना। दिए गए कार्य को जिम्मेदारी से करना। समय का खास ख्याल रखना की दिया गया काम अपने समय पर हो। ताकि उद्यमी को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान न हो। व्यावहारिक ज्ञान ब्यक्ति को दुसरे कामगार के बिच में समन्वय स्थापित करने में मदद करता है। जिससे किसी भी प्रकार का काम में कोई विवाद उत्पन्न नहीं होता है। भले कामगार हो या उद्यमी दोनो के साथ समन्वय समान रहता है। काम अपने जगह पर है। रहन सहन का तरीका अपने जगह पर है। भले ब्यक्ति काम में कितना ही माहिर क्यों न हो। यदि व्यावहार अच्छा नहीं है। तो वो किसी काम नहीं माना जाता है। उद्यमी के सामने वो किसी काम का नहीं होता है। अक्सर ऐसा देखा गया है। सिध्दांत उसके चरित्र को दर्शाता है। व्यावहार उसके भूमिका को दर्शाता है। इसलिए काम के संदर्भ में कर्मचारियों को दिए जाने वाले सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान बहूत जरूरी है।       

 

भारतीय प्रणाली में ज्ञान (Knowledge) की तुलना में प्रमाणपत्र क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ज्ञान की तुलना में प्रमाणपत्र क्यों महत्वपूर्ण हैं? ये सिर्फ भारतीय प्रणाली में नहीं बल्कि पुरे दुनिया में ऐसा ही मत है। कोई भी ब्यक्ति कही काम के तलाश में किसी ब्यावसाई के पास जाता है। अपने बारे में बताता है। ब्यावसाई उससे कुछ पूछ ताछ करता है। पर इतना करने से कैसे कोई ब्यावसाई किसी अनजान ब्यक्ति पर विश्वास कर लेगा। जब तक की वो क्या जनता है? क्या तजुर्बा उसके पास है? कहाँ से आया है? इस ब्यावसाई में आने के पहले क्या कर रहा था? कहाँ कहाँ काम किया है? या नया है। काम पकड़ने के लिए सारा बात झूट तो नहीं बोल रहा है? कुछ भी हो सकता है? भारतीय सुरक्षा प्रणाली भी यही लोगो को समय समय अवगत पर कराता है। किसी भी अनजान लोगो के संपर्क में सोच समझ कर विचार करे। सिर्फ बात पर विश्वास नहीं करे। आये दिन हो रहे चोरी और धोखादारी से जगत विदित है। इसलिए भारतीय प्रणाली में ज्ञान की तुलना में प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण है। ब्यक्ति कौन है? नाम पता कहाँ का है? ब्यक्ति कहाँ से है? कितना पढ़ा लिखा है? क्या क्या योग्यता उसके पास है? कौन कौन से काम में माहिर है? उसका सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान कैसा है? सब जानकारी उसके प्रमाणपत्र में अंकित होता है। विद्यालय, महाविद्यालय, प्रतिष्ठान का मोहर और हस्ताक्षर होता है। जो की उसके योग्यता और उस ब्यक्ति को प्रमाणित करता है। 





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